बंगाल: 79 आदिवासियों ने SIR फॉर्म भरने से किया इनकार, ‘माझी सरकार’ पर जताया भरोसा
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रजिस्ट्रेशन (SIR) प्रक्रिया के अंतिम दिन रानीबांध ब्लॉक के मुचिकाटा और भेधुआशोल गांवों के 79 आदिवासी लोग फॉर्म भरने से अब भी इनकार कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि वे पहले से ही ‘माझी सरकार’ द्वारा जारी पहचान पत्र रखते हैं, इसलिए उन्हें अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने की आवश्यकता नहीं है।
माझी सरकार क्या है?
‘माझी सरकार’ कोई आधिकारिक सरकारी संस्था नहीं, बल्कि संथाल आदिवासी समाज का एक पारंपरिक संगठन है। स्वतंत्रता सेनानी हीरा सिंहदेव (कंगाल माझी) द्वारा स्थापित इस व्यवस्था में सामाजिक मुद्दों व अधिकारों—जल, जंगल, जमीन—पर सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं। इसी कारण आदिवासी समुदाय में इसका गहरा प्रभाव है।
ओडिशा से आए प्रतिनिधियों का असर
SIR फॉर्म भरने से इनकार करने वाले लोग हाल ही में ओडिशा से आए ‘समाजवाद अंतरराष्ट्रीय माझी सरकार’ संगठन के प्रतिनिधियों से मिले। इनमें गीता मुर्मू भी शामिल थीं। खास पोशाक में आयोजित इस मीटिंग में उन्होंने दावा किया कि आदिवासी “भारत के मूल निवासी” हैं और उन्हें अलग पहचान पत्र की जरूरत नहीं है।
हाल ही में पुलिस ने माझी सरकार के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में ओडिशा के एक व्यक्ति समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन गांव वाले प्रतिनिधियों की बातों से प्रभावित दिखे और उन्होंने SIR फॉर्म भरने से मना करने के अपने फैसले को दोहराया।
प्रशासन और आदिवासी संगठनों के प्रयास नाकाम
स्थानीय प्रशासन ने आदिवासी परिवारों को समझाने की कोशिश की, लेकिन विरोध का सामना करना पड़ा। बाद में पुलिस ने माझी सरकार के नाम पर चल रहे फर्जी रैकेट का खुलासा किया और ओडिशा व बारिकुल से दो और बांदवान से एक आरोपी को गिरफ्तार किया।
स्थिति को संभालने के लिए आदिवासी एकता मंच, भारत जाकात माझी परगना महल, और अन्य आदिवासी बुद्धिजीवी संगठनों के 15 प्रतिनिधि गांव पहुंचे। हालांकि, गांव वाले आदिवासी संगठनों से बातचीत के बजाय केवल ओडिशा की टीम के साथ चर्चा करने पर अड़े रहे।
आदिवासी नेताओं ने SIR फॉर्म भरने के महत्व पर जोर दिया, लेकिन गांव वाले उनके साथ बैठक के लिए तैयार नहीं हुए। मजबूर होकर प्रतिनिधियों ने सड़क पर खड़े होकर लोगों को जागरूक किया।
“भ्रम फैलाया जा रहा है” — आदिवासी नेता
आदिवासी एकता मंच के सदस्य बिश्वनाथ सरदार ने कहा कि समुदाय के कुछ लोगों को बाहरी लोग बहका रहे हैं।
चितल अब्दार ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि वे विचार-विमर्श के बाद फॉर्म भर देंगे। उन्हें बताया गया है कि SIR फॉर्म भरना उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है।”

