SIR में ‘तार्किक अंतर’ वाले नाम सार्वजनिक किए जाएं, सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान ‘तार्किक अंतर’ (Logical Discrepancies) श्रेणी में रखे गए मतदाताओं के नाम सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश चुनाव आयोग (EC) को दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसे नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक/तालुका कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में लगाए जाएं, ताकि प्रभावित लोग समय रहते अपने दस्तावेज और आपत्तियां दर्ज करा सकें।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ तमिलनाडु में चल रहे SIR के दौरान कथित मनमानी और प्रक्रियात्मक खामियों को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में ‘तार्किक अंतर’ श्रेणी से जुड़े मामलों को भी चुनौती दी गई थी।
DMK ने उठाए सवाल
डीएमके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अमित आनंद तिवारी और अधिवक्ता विवेक सिंह ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि जिन मतदाताओं के नाम ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ सूची में डाले गए हैं, उन्हें वोटर लिस्ट में नाम बनाए रखने के लिए पूरा और पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, खासकर चुनावी राज्य तमिलनाडु में।
तीन श्रेणियों में वर्गीकरण
सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि SIR के तहत मतदाताओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है—
- मैप्ड,
- अनमैप्ड,
- तार्किक अंतर (Logical Discrepancies)
अदालत ने कहा कि ‘तार्किक अंतर’ की श्रेणी में आमतौर पर ये विसंगतियां पाई गई हैं—
- पिता के नाम में बेमेल
- माता-पिता की उम्र में असामान्य अंतर
- माता-पिता की उम्र में 50 वर्ष से अधिक का अंतर
- दादा-दादी की उम्र में 40 वर्ष से कम का अंतर
- छह से अधिक संतानें दर्ज होना
10 दिन का अतिरिक्त समय
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम ‘तार्किक अंतर’ सूची में हैं और जिन्होंने अब तक अपने दावे या आपत्तियां दर्ज नहीं कराई हैं, उन्हें सूची प्रदर्शित होने की तारीख से 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रभावित व्यक्ति अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से भी दस्तावेज या आपत्ति जमा कर सकते हैं। यह प्रतिनिधि बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी हो सकता है, जिसके पास हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान युक्त प्राधिकरण पत्र होना चाहिए।
प्रशासन और पुलिस को भी निर्देश
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में दस्तावेजों की प्राप्ति और सुनवाई के लिए पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध कराई जाए। साथ ही जिन राज्यों में SIR प्रक्रिया चल रही है, वहां के डीजीपी, पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टरों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

