Supreme Court of India ने बोहरा समाज में बहिष्कार पर 40 साल पुरानी याचिका की वैधता पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। Supreme Court of India ने दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) से जुड़ी 1986 की एक जनहित याचिका (PIL) की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। अदालत यह विचार कर रही है कि क्या किसी धार्मिक समुदाय के प्रमुख को अपने सदस्यों को समाज से बाहर करने का अधिकार है और क्या यह प्रथा संविधान के तहत संरक्षित धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे में आती है।
1962 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका
यह याचिका Central Board of Dawoodi Bohra Community द्वारा 1986 में दायर की गई थी, जिसमें 1962 के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 को निरस्त कर दिया गया था।
इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को समुदाय से बहिष्कृत करना गैरकानूनी माना गया था।
9 जजों की संविधान पीठ कर रही सुनवाई
मामले की सुनवाई 9 जजों की संविधान पीठ कर रही है, जिसकी अध्यक्षता Justice Suryakant कर रहे हैं। पीठ में Justice B. V. Nagarathna समेत अन्य न्यायाधीश शामिल हैं। यह सुनवाई धार्मिक स्वतंत्रता और समानता जैसे संवैधानिक मुद्दों से भी जुड़ी है, जिसमें Sabarimala Temple से संबंधित मामले भी शामिल हैं।
बहिष्कार को बताया ‘मानव गरिमा पर असर’
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील Raju Ramachandran ने दलील दी कि दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार का असर व्यक्ति की गरिमा और सामाजिक जीवन पर गंभीर रूप से पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ धार्मिक अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि सजा के अनुपात और उसके सामाजिक प्रभाव का भी प्रश्न है।
कोर्ट ने उठाया प्रक्रिया पर बड़ा सवाल
जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि क्या संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों को चुनौती दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि अदालत अपनी ही स्थापित प्रक्रिया से हटकर इस तरह के मामलों पर विचार कैसे कर सकती है।
धार्मिक अधिकार बनाम मौलिक अधिकार
मामले का मुख्य मुद्दा यह है कि:
- क्या धार्मिक प्रमुख (दाई) को बहिष्कार का अधिकार है?
- क्या यह धार्मिक स्वतंत्रता का हिस्सा है?
- या फिर यह व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है?
सुनवाई जारी
अदालत ने संकेत दिया है कि पहले याचिका की वैधता और प्रक्रिया स्पष्ट की जाएगी, उसके बाद ही मामले के मूल पक्ष (मेरिट) पर सुनवाई होगी। इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को जारी रहेगी।

