बिहार चुनाव: क्या आयोग का ‘महिला लाभ’ फैसला रहा गेम-चेंजर?—विपक्ष ने उठाए सवाल
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए ने 243 सीटों में से 207 जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि महागठबंधन महज 32 सीटों पर सिमट गया। भाजपा को 89, जेडीयू को 85, चिराग पासवान की LJP (रामविलास) को 19, जीतनराम मांझी की HAM को 5 और उपेंद्र कुशवाहा की RLSP को 4 सीटें मिलीं। विपक्ष में राजद को 25, कांग्रेस को 6, माले को 2 और AIMIM को 5 सीटें मिलीं। बसपा, माकपा और एक निर्दलीय को एक-एक सीट। लेकिन इस जीत के पीछे विपक्ष ने चुनाव आयोग (ECI) के एक फैसले पर सवाल उठाए हैं—आचार संहिता लागू होने के बावजूद नीतीश सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत महिलाओं को 10-10 हजार रुपये बांटने की अनुमति। विपक्ष का दावा है कि इससे NDA को फायदा हुआ, जबकि 2004 के बाद कम से कम 5 राज्यों में ऐसी 10 योजनाओं पर ECI ने रोक लगाई थी, जहां सरकारें बदल गईं। क्या यह ‘चुनावी लाभ’ का मामला है? आइए, फैसले और नतीजों का विश्लेषण करें।
बिहार में आचार संहिता के बीच ’10-10 हजार’ का वितरण: विपक्ष का आरोप
नीतीश सरकार ने 26 सितंबर 2024 को ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की शुरुआत की, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 10 हजार रुपये की पहली किश्त दी गई। कुल बजट 10 हजार करोड़ रुपये का है। लेकिन 6 अक्टूबर को आचार संहिता लगने के बाद भी 5 किश्तें जारी रहीं—एक तो चुनाव घोषणा वाले दिन ही। राजद ने ECI से शिकायत की, लेकिन रोक नहीं लगी। अक्टूबर में बड़े अखबारों में विज्ञापन देकर भुगतान की अंतिम तिथि दिसंबर तय की गई। विपक्ष का कहना है कि इससे 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ मिला, जो वोट बैंक प्रभावित करने जैसा है। नतीजा: NDA की प्रचंड जीत, जेडीयू-भाजपा का गठबंधन दो तिहाई बहुमत से सत्ता में लौटा।

जहां ECI ने रोका: 5 राज्यों में 10 योजनाओं पर रोक, 3 में सरकारें गिरीं
ECI ने आचार संहिता के दौरान ‘मुद्रा वोट’ या ‘चुनावी लाभ’ वाली योजनाओं पर सख्ती बरती। 2004 के बाद 5 राज्यों में ऐसी 10 योजनाओं पर रोक लगी, जहां सत्ताधारी सरकारें हार गईं।
राजस्थान (2023): कांग्रेस की ‘इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना’ (मुफ्त स्मार्टफोन) पर रोक। ECI ने कहा, “यह मतदाताओं को लुभाने वाली नई घोषणा है।” नतीजा: कांग्रेस हारी, भाजपा बहुमत से लौटी।
तेलंगाना (2023): BRS की ‘रायथु बंधु’ (PM-KISAN जैसी, किसानों को 5,000 रुपये) पर रोक। वित्त मंत्री के बयान को आचार संहिता उल्लंघन माना। नतीजा: BRS साफ, कांग्रेस बहुमत से सत्ता में।
आंध्र प्रदेश (2024): YSRCP की ‘YSR चेयुथा’ (महिलाओं को 75,000 रुपये) सहित 6 DBT योजनाओं पर रोक। ECI ने कहा, “मतदान से 2 दिन पहले वितरण लुभावना।” ‘YSR आसरा’ (SHG महिलाओं को सहायता) और ‘जगनन्ना विद्या दीवेना’ (स्कॉलरशिप) भी रुकीं। नतीजा: YSRCP साफ, TDP-भाजपा गठबंधन बहुमत से।
ओडिशा (2019): BJD की ‘कालिया’ (किसानों को 10,000 रुपये + बीमा) पर रोक। ECI ने PM-KISAN से तुलना ठुकराई। नतीजा: BJD बनी, लेकिन भाजपा मजबूत हुई।
तमिलनाडु (2004, 2011): 2004 में AIADMK की बिजली बिल भरपाई योजना रोकी। 2011 में DMK की मुफ्त रंगीन टीवी योजना पर रोक। नतीजा: 2011 में AIADMK गठबंधन 203 सीटें जीतकर सत्ता में।
जहां नहीं रोका: 2 राज्यों में जारी, सरकारें लौटीं
बिहार (2025): आचार संहिता के बाद भी 5 किश्तें जारी। राजद की शिकायत बेअसर। नतीजा: NDA दो तिहाई बहुमत।
झारखंड (2024): JMM की ‘माईयां सम्मान’ (महिलाओं को 2,500 रुपये/माह) वोटिंग से रात पहले जारी। भाजपा की शिकायत पर रोक नहीं। नतीजा: JMM गठबंधन दो तिहाई बहुमत।
विशेषज्ञों की राय: लोकतंत्र पर सवाल, ECI की निष्पक्षता पर बहस
राजनीतिक विश्लेषक अभिरंजन कुमार कहते हैं, “यदि आचार संहिता के बीच कैश ट्रांसफर जारी रहें तो NDA की 200 सीटें भी अनफेयर लगेंगी। यह लोकतंत्र को कमजोर करता है—5 साल का प्रदर्शन भूलाकर वोट खरीदना। विपक्ष को रणनीति बदलनी होगी।”
राशिद किदवई बोले, “भारतीय लोकतंत्र ब्रिटिश मॉडल पर है, जहां मर्यादा पहली शर्त। लेकिन यहां लचीला रवैया है। ECI को सबके लिए समान अवसर सुनिश्चित करना चाहिए। बिहार-झारखंड में जारी योजनाओं ने NDA/JMM को फायदा दिया, जबकि अन्य राज्यों में रोक से सत्ताएं गिरीं।”
हेमंत अत्री ने कहा, “बिहार जीत ने मोदी-शाह को अजेय साबित किया। भाजपा OBC-दलित वोटबैंक मजबूत करेगी। विपक्ष को 2026-27 चुनावों से पहले संगठन सुधारना होगा।”
चुनाव आयोग का रिकॉर्ड: 67% मतदान, महिला भागीदारी 71%
ECI ने 72 घंटे में इंडेक्स कार्ड जारी किया। 1951 के बाद सबसे अधिक 67.13% मतदान और 71.78% महिला भागीदारी। SIR से शून्य अपील, कोई पुनर्मतदान मांग। BLO को दोगुना मानदेय, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण। मतदान केंद्रों पर 1,200 मतदाताओं की सीमा, मोबाइल जमा सुविधा।

