देश में जनसांख्यिकीय बदलावों पर केंद्र सरकार सख्त, घुसपैठ और अवैध प्रवास की जांच को बनी हाई-लेवल कमेटी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों और अवैध प्रवास को लेकर बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार को एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की, जो देशभर में जनसंख्या संरचना में हो रहे परिवर्तनों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी। समिति विशेष रूप से अवैध घुसपैठ, अनियंत्रित प्रवास और उसके सामाजिक, प्रशासनिक व सुरक्षा प्रभावों की जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज करेंगे समिति की अध्यक्षता
गृह मंत्रालय द्वारा गठित इस “उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकीय परिवर्तन समिति” की अध्यक्षता Prakash Prabhakar Naolekar करेंगे। समिति में जनगणना आयुक्त समेत कई वरिष्ठ विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में पूर्व आईएएस अधिकारी Durga Shankar Mishra, पूर्व आईपीएस अधिकारी Balaji Srivastava और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Shamika Ravi शामिल हैं। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (Foreigners-I) को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
एक साल में सौंपनी होगी रिपोर्ट
गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी होगी। समिति का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा और इसके संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी सहायता गृह मंत्रालय उपलब्ध कराएगा।
किन मुद्दों की होगी जांच?
सरकार ने समिति को देशभर में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की “प्रकृति, कारण और प्रभाव” का गहन अध्ययन करने का जिम्मा दिया है। समिति यह भी जांच करेगी कि किन क्षेत्रों में आबादी का असामान्य बदलाव अवैध प्रवास, सीमा पार घुसपैठ, अनियंत्रित आबादी आवाजाही या प्रशासनिक कमजोरियों के कारण हो रहा है।
अधिसूचना में कहा गया है कि कुछ इलाकों में जनसंख्या परिवर्तन सामान्य जन्म और मृत्यु दर के आंकड़ों से मेल नहीं खाते। ऐसे मामलों में बाहरी कारणों की भूमिका की आशंका जताई गई है।
सुरक्षा और संसाधनों पर असर का अध्ययन
सरकार का मानना है कि अनियंत्रित जनसांख्यिकीय बदलावों का असर शासन व्यवस्था, सार्वजनिक सेवाओं, रोजगार, सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। समिति इन पहलुओं का भी अध्ययन करेगी और भविष्य के लिए नीतिगत, प्रशासनिक तथा कानूनी सुझाव देगी।
अवैध घुसपैठ पर केंद्र की नजर
हाल के वर्षों में कई राज्यों में अवैध प्रवास और सीमा पार घुसपैठ को लेकर लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक बहस होती रही है। ऐसे में केंद्र सरकार की यह पहल आने वाले समय में नागरिकता, सीमा सुरक्षा और जनसंख्या नीति से जुड़े बड़े फैसलों की दिशा तय कर सकती है।
सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक संतुलन से जुड़े मुद्दों पर अब और अधिक सख्ती बरती जाएगी तथा अवैध गतिविधियों पर व्यापक स्तर पर निगरानी रखी जाएगी।

