अब देरी से नहीं चलेंगी ट्रेनें! रेलवे ने संचालन सुधारने के लिए उठाया बड़ा कदम
यात्रियों को समय पर, सुरक्षित और भरोसेमंद रेल यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने एक अहम पहल की है। रेलवे ने कमर्शियल, ऑपरेटिंग, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल विभागों की संयुक्त विशेष टीम का गठन किया है, जो ट्रेनों के संचालन में आने वाली तकनीकी बाधाओं को पहले ही पहचानकर दूर करेगी।
वैगन खराबी बनेगी बीते दिनों की बात
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अक्सर मालगाड़ियों (वैगन ट्रेनों) में तकनीकी खराबी के चलते रेल परिचालन बाधित होता है। इससे उसी रूट पर पीछे चल रही पैसेंजर, एक्सप्रेस और मेल ट्रेनें या तो लंबे समय तक क्लीयरेंस का इंतजार करती हैं या उन्हें डायवर्ट करना पड़ता है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
नई गठित संयुक्त टीम का उद्देश्य ऐसी रुकावटों को न्यूनतम करना और ट्रेन सेवाओं को अधिक भरोसेमंद बनाना है।
ग्रीस सील को नुकसान बना बड़ी वजह
रेलवे के विभिन्न जोनों से यह रिपोर्ट सामने आई है कि खुले वैगनों में ग्रीस सील के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसकी मुख्य वजह तिरपाल कवर, नायलॉन रस्सियां, तार या अन्य ढीली वस्तुएं हैं, जो चलती ट्रेन के दौरान एक्सल बॉक्स में फंस जाती हैं।
इससे न केवल वैगन में मैकेनिकल खराबी आती है, बल्कि ट्रेन को बीच रास्ते में रोकना पड़ता है, जो सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर खतरा पैदा करता है।
लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने जताई चिंता
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के केंद्रीय अध्यक्ष राम शरण ने बताया कि देखने में मामूली लगने वाली ये लापरवाहियां परिचालन के लिहाज से गंभीर परिणाम पैदा करती हैं।
उन्होंने कहा कि एक वैगन में आई खराबी पूरे सेक्शन को ब्लॉक कर सकती है, जिससे दर्जनों ट्रेनें देरी का शिकार हो जाती हैं और पूरे नेटवर्क पर असर पड़ता है।
स्पष्ट गाइडलाइंस, सख्त निगरानी
रेलवे की संयुक्त टीम ने लोडिंग और अनलोडिंग प्वाइंट्स पर सभी विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी हैं। नई गाइडलाइंस के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि—
- वैगन सुरक्षित तरीके से तिरपाल से ढके हों
- कोई ढीला या लटका हुआ कवर, रस्सी या तार न छोड़ा जाए
- सभी खामियों को उद्गम स्थल पर ही ठीक किया जाए
इससे टाली जा सकने वाली तकनीकी खराबियों को रोका जा सकेगा।
जिम्मेदारी तय, होगी कार्रवाई
ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल के जोनल एडवाइजर तपस चट्टराज ने बताया कि यदि किसी ट्रेन में खराबी आती है, तो उसे साइडिंग पर ले जाया जाता है। लेकिन यदि ट्रेन बीच सेक्शन में रुकती है, तो विस्तृत जांच होती है और जिम्मेदार कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।
रेलवे ने यह भी निर्देश दिया है कि चीफ गुड्स सुपरवाइजर और स्टेशन सुपरिटेंडेंट हर महीने गलत तरीके से लगाए गए तिरपाल से जुड़े मामलों की रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसे सीनियर डीसीएम कार्यालय में जमा करना अनिवार्य होगा।
यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ
रेलवे का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ मालगाड़ियों की तकनीकी समस्याएं कम होंगी, बल्कि पैसेंजर ट्रेनों की समयबद्धता, सुरक्षा और विश्वसनीयता भी बेहतर होगी।
यह कदम यात्रियों के लिए सुगम और तनाव-मुक्त रेल सफर की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

