मंत्रालय ने कहा—देशभर में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति, 60 दिनों का पर्याप्त स्टॉक और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रहीं
नई दिल्ली: देश में ईंधन की कमी को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह सामान्य होने का दावा किया है। मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि देश के किसी भी हिस्से में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है और सप्लाई चेन सुचारू रूप से काम कर रही है।
पेट्रोल पंप पर नहीं होगी राशनिंग
मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप बिना किसी बाधा के संचालित हो रहे हैं। किसी भी पंप को ईंधन की सप्लाई घटाने या राशनिंग लागू करने के निर्देश नहीं दिए गए हैं।
तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंप संचालकों को राहत देते हुए उनकी क्रेडिट सीमा 1 दिन से बढ़ाकर 3 दिन से अधिक कर दी है, ताकि सप्लाई में किसी तरह की दिक्कत न आए।
कच्चे तेल की मजबूत सप्लाई
सरकार ने बताया कि भारत इस समय 41 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिससे सप्लाई में विविधता आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, खासकर पश्चिमी देशों से पर्याप्त उपलब्धता के कारण किसी भी संभावित बाधा को आसानी से संभाला जा रहा है।
देश की सभी रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है।
60 दिन का सुरक्षित भंडार
मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है, जबकि वर्तमान में लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, रिफाइंड उत्पाद और रणनीतिक भंडार (Strategic Caverns) शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद देश में लगभग दो महीने तक ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित है।
एलपीजी उत्पादन में बढ़ोतरी
घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन में 40% की वृद्धि की गई है, जिससे अब रोजाना करीब 50 टीएमटी उत्पादन हो रहा है, जो कुल जरूरत का 60% से अधिक है।
देश की कुल दैनिक जरूरत करीब 80 टीएमटी है, जिसमें अब केवल 30 टीएमटी आयात करना पड़ रहा है।
पीएनजी को बढ़ावा, अफवाहों का खंडन
मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देना एलपीजी की कमी की वजह से नहीं है, बल्कि यह सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है।
भारत अपनी कुल गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा कर रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है।

