अटारी-वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी: BSF जवानों के जोश से गूंजी सीमा, भारत माता की जय के नारों से माहौल देशभक्तिमय
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर अमृतसर स्थित अटारी–वाघा बॉर्डर पर आयोजित विशेष रिट्रीट सेरेमनी ने देशभक्ति का अद्भुत नजारा पेश किया। सीमा पर मौजूद हर शख्स के दिल में देश के लिए गर्व और जोश साफ झलक रहा था। “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “हिंदुस्तान जिंदाबाद” के गगनभेदी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा, जबकि सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों का जोश देखने लायक था।
हर साल 26 जनवरी को अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी को विशेष दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर स्कूलों के बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम सैलानियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने। हजारों की संख्या में पहुंचे देश-विदेश के पर्यटकों ने देशभक्ति के नारों के साथ BSF के जांबाज जवानों का उत्साह बढ़ाया।
सैन्य शौर्य के साथ दिखी अनुशासन की मिसाल
अटारी सीमा पर BSF जवानों का अनुशासित मार्च, जोश और शौर्य दर्शकों को भावुक कर गया। हर कदम पर देश के प्रति समर्पण और साहस झलक रहा था। दर्शकों ने तालियों और नारों के जरिए जवानों का हौसला बढ़ाया, जिससे माहौल और भी ऊर्जावान हो गया।
ट्रेंड मिलिट्री डॉग्स बने आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का एक खास आकर्षण ट्रेंड मिलिट्री डॉग्स की भागीदारी रही। इन सैन्य कुत्तों ने भारतीय जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर मार्च किया। उनकी मौजूदगी ने देश की सुरक्षा में निभाई जाने वाली उनकी अहम, लेकिन अक्सर अनदेखी भूमिका को उजागर किया। सटीकता और अनुशासन के साथ किए गए मार्च को देखकर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं और भावुक प्रतिक्रिया दी।
सुरक्षा कारणों से बदली गई परंपराएं
गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद 8 मई से सीमा चौकियों पर औपचारिक परेड रोक दी गई थी। अब यह आयोजन फिर से शुरू किया गया है, लेकिन 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रिट्रीट सेरेमनी की कुछ परंपराओं में बदलाव किए गए हैं।
अब परेड के दौरान सीमा के गेट बंद रहते हैं और दोनों देशों के जवान आपस में हाथ नहीं मिलाते। इस कारण न तो दरवाजे खोले गए और न ही मिठाइयों या उपहारों का आदान-प्रदान हुआ। इसके बावजूद, सेरेमनी का जोश और गरिमा पूरी तरह बरकरार रही।
देशभक्ति की मिसाल बनी रिट्रीट सेरेमनी
अटारी-वाघा बॉर्डर पर आयोजित यह रिट्रीट सेरेमनी न सिर्फ सैन्य शक्ति और अनुशासन का प्रतीक बनी, बल्कि इसने देशवासियों के दिलों में राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत किया। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह आयोजन एक बार फिर साबित कर गया कि भारत की सीमाएं सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि साहस, समर्पण और गर्व की पहचान हैं।

