‘अंतरिक्ष हमें खुद को समझना सिखाता है…’ IIT दिल्ली में सुनीता विलियम्स ने छात्रों को दिया जीवन और विज्ञान का संदेश
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) में अंतरिक्ष विज्ञान, प्रेरणा और जीवन-दर्शन का अद्भुत संगम देखने को मिला। नासा की सेवानिवृत्त अंतरिक्ष यात्री और अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन सुनीता एल. विलियम्स ने डोगरा हॉल में छात्रों से संवाद करते हुए यह संदेश दिया कि अंतरिक्ष केवल तारों और ग्रहों का अध्ययन नहीं, बल्कि इंसान को खुद को समझने का अवसर देता है।
अपने व्याख्यान ‘The Making of an Astronaut: Sunita Williams’ Story’ के दौरान सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में बिताए पलों के वीडियो दिखाए और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि आज का दौर मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और हर मिशन हमें नई चुनौतियों के लिए तैयार करता है।
“समाधान जटिल नहीं, कई बार बेहद सरल होता है”
अंतरिक्ष मिशनों की जटिलताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही तकनीक और बैकअप सिस्टम मौजूद हों, लेकिन कई बार समस्या का समाधान बहुत साधारण होता है। ज़रूरत होती है सिर्फ धैर्य, ध्यान और सही दृष्टिकोण की। उन्होंने कहा कि यह सीख केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी है।
“गुरुत्वाकर्षण हटते ही जीवन को देखने का नजरिया बदल जाता है”
शून्य गुरुत्वाकर्षण के अनुभव साझा करते हुए सुनीता विलियम्स ने बताया कि जब गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, तब पदार्थ, दवाइयों और इंसानी व्यवहार में होने वाले बदलाव हमें विज्ञान और मानव शरीर को नए नजरिए से समझने का मौका देते हैं। यही अध्ययन भविष्य की वैज्ञानिक खोजों का आधार बनता है।
प्रो. वी.एन. वज़िरानी इंस्टीट्यूट लेक्चर की पहली वक्ता बनीं सुनीता विलियम्स
यह व्याख्यान प्रो. वी.एन. वज़िरानी इंस्टीट्यूट लेक्चर सीरीज़ के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें सुनीता विलियम्स पहली वक्ता रहीं। इस लेक्चर सीरीज़ की स्थापना प्रो. वज़िरानी की स्मृति में उनके पुत्र विजय वज़िरानी और उमेश वज़िरानी ने की। कार्यक्रम में IIT दिल्ली के निदेशक, उप-निदेशक, डीन, शिक्षक, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
“टीम के लिए सोचो, तभी असली सफलता मिलती है”
प्रो. शिल्पी शर्मा द्वारा संचालित फायरसाइड चैट में सुनीता विलियम्स ने अपने बचपन और छात्र जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि टीमवर्क की भावना उन्हें खेल और तैराकी से मिली, जिसने आगे चलकर अंतरिक्ष मिशनों में अहम भूमिका निभाई।
“अंतरिक्ष में भारतीय भोजन बांटना सबसे खास पल था”
अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में भारतीय भोजन का पैकेट खोलना और उसे साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ साझा करना उनके लिए बेहद भावुक और यादगार पल था। उन्होंने कहा कि खाना, चाहे धरती पर हो या अंतरिक्ष में, लोगों को जोड़ने का काम करता है।
‘ओवरव्यू इफेक्ट’ ने बदली सोच
पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने के अनुभव को साझा करते हुए सुनीता विलियम्स ने ‘ओवरव्यू इफेक्ट’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा,
“ऊपर से देखने पर एहसास होता है कि हम सभी एक ही ग्रह के निवासी हैं और सीमाएं बेमानी लगने लगती हैं।”
सुनीता विलियम्स का यह संबोधन IIT दिल्ली के छात्रों के लिए सिर्फ एक व्याख्यान नहीं, बल्कि जीवन, विज्ञान और मानव क्षमता को समझने की गहरी प्रेरणा बन गया। उनके शब्दों ने छात्रों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास दिया।

