Explained: अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी में नहीं होगा भेदभाव, यूजीसी ने लागू किए सख्त नए नियम, जानिए क्या बदलेगा
नई दिल्ली।
उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ होने वाले किसी भी तरह के भेदभाव पर रोक लगाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। यूजीसी ने यूजीसी नियम 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जो देश के सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और डीम्ड यूनिवर्सिटी पर तत्काल प्रभाव से लागू हो चुके हैं।
इन नए नियमों का उद्देश्य शिक्षा परिसरों को सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसर वाला वातावरण बनाना है, ताकि किसी भी छात्र या कर्मचारी को जाति, धर्म, लिंग या किसी अन्य आधार पर भेदभाव का सामना न करना पड़े।
क्यों लाए गए नए नियम
यूजीसी का यह फैसला जातिगत भेदभाव, लैंगिक असमानता, दिव्यांग व्यक्तियों के बहिष्कार, हाशिए पर पड़े वर्गों के छात्रों के उत्पीड़न और उच्च शिक्षण संस्थानों में सामने आई कई गंभीर शिकायतों के बाद लिया गया है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप इन नियमों को तैयार किया गया है। इससे पहले वर्ष 2012 में लागू नियमों को अब समाप्त कर दिया गया है।
किसी भी आधार पर भेदभाव बर्दाश्त नहीं
नए नियमों के तहत किसी भी शिक्षण संस्थान में अब धर्म, जाति, लिंग, नस्ल, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। यदि ऐसा पाया गया, तो संबंधित संस्थान को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर
पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान यूजीसी को आदेश दिया था कि वह उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव और उत्पीड़न रोकने के लिए ठोस नियम बनाए। कोर्ट ने इसके लिए समयसीमा भी तय की थी। यूजीसी ने उसी के तहत यह नया ढांचा तैयार कर लागू किया है।
सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए समानता
इन नियमों के तहत छात्र, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और प्रबंधन—सभी को समान अधिकार और सुरक्षा मिलेगी। संस्थानों को समावेशी नीति अपनानी होगी और सभी वर्गों के लिए बराबर अवसर सुनिश्चित करने होंगे।
भेदभाव की परिभाषा क्या होगी
यूजीसी ने साफ किया है कि भेदभाव का अर्थ है—
- जाति आधारित
- धर्म आधारित
- लिंग (पुरुष, महिला और तृतीय लिंग)
- जन्म स्थान
- दिव्यांगता के आधार पर असमान व्यवहार
इन सभी को नियमों के दायरे में रखा गया है।
24 घंटे काम करेगा समता हेल्पलाइन
हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में समता हेल्पलाइन नंबर अनिवार्य होगा, जो 24×7 काम करेगा।
- छात्र चाहें तो गोपनीय रूप से शिकायत दर्ज करा सकेंगे
- गंभीर मामलों में पुलिस को तुरंत सूचना देना अनिवार्य होगा
- हेल्पलाइन और शिकायत प्रक्रिया कॉलेज की वेबसाइट पर प्रमुखता से दिखानी होगी
हर संस्थान में बनेगा समान अवसर केंद्र (EOC)
नए नियमों के तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में समान अवसर केंद्र बनाना अनिवार्य होगा।
इस केंद्र की भूमिका होगी—
- भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच
- शिकायतकर्ता की सुरक्षा और गोपनीयता
- प्रशासन, पुलिस और अन्य एजेंसियों से समन्वय
समता समिति का गठन
हर संस्थान में एक समता समिति बनाई जाएगी, जिसमें—
- संस्थान प्रमुख (पदेन अध्यक्ष)
- वरिष्ठ संकाय सदस्य
- गैर-शिक्षण कर्मचारी
- सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि
- छात्रों के प्रतिनिधि
शामिल होंगे। समिति साल में कम से कम दो बार बैठक करेगी।
शिकायत के बाद क्या होगा
- शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर समिति की बैठक
- 15 दिनों में जांच रिपोर्ट तैयार
- एक सप्ताह में संस्थान प्रमुख द्वारा कार्रवाई
- गंभीर मामलों में पुलिस और यूजीसी को सूचना
यदि शिकायत संस्थान प्रमुख के खिलाफ हो, तो जांच प्रक्रिया अलग से संचालित होगी।
नियमों का पालन नहीं किया तो क्या कार्रवाई होगी
यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो—
- यूजीसी योजनाओं से बाहर किया जा सकता है
- डिग्री प्रोग्राम चलाने पर रोक
- ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन पर प्रतिबंध
- गंभीर मामलों में मान्यता तक रद्द की जा सकती है
लोकपाल के पास अपील का अधिकार
यदि शिकायतकर्ता कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है, तो वह लोकपाल के पास अपील कर सकता है। यूजीसी इस पूरे मामले की निगरानी करेगा और जरूरत पड़ने पर जांच समिति गठित करेगा।
क्यों है यह फैसला अहम
भारत में उच्च शिक्षा तेजी से विस्तार कर रही है। ऐसे में बिना समानता और सुरक्षा के विस्तार से असमानता और भेदभाव और बढ़ सकता है।
यूजीसी के नए नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कैंपस कल्चर बदलने की कोशिश हैं—जहां समानता अब सिर्फ सुझाव नहीं, बल्कि अनिवार्य नियम है।

