रेलवे टेंडर घोटाला: लालू–तेजस्वी यादव की चार्जशीट पर सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई
रेलवे टेंडर घोटाला मामले में आरोपी पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में चार्जशीट की वैधता पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं ने अदालत से कहा कि ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने से पहले अभियोजन के लिए आवश्यक अनुमति (सैंक्शन) नहीं ली गई थी। मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी।
लालू और तेजस्वी यादव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हाईकोर्ट को बताया कि सीबीआई ने जिन दो लेन-देन को आधार बनाया है, वे सरकारी नीति के तहत किए गए थे और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के दायरे में नहीं आते। उन्होंने दलील दी कि ऐसे में इन लेन-देन को भ्रष्टाचार का मामला मानना कानूनन गलत है।
इससे पहले 6 जनवरी को तेजस्वी यादव की याचिका पर और 5 जनवरी को लालू यादव की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया था।
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी सहित अन्य धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने के आदेश दिए थे।
ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान लालू यादव की ओर से अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने तर्क दिया था कि अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और अभियोजन की अनुमति की वैधता संदेह के घेरे में है। उन्होंने कहा कि पहले सीबीआई ने यह दावा किया कि अनुमति की जरूरत नहीं है और बाद में अनुमति मिलने की बात कही, जो कानून सम्मत नहीं है।
वहीं, सीबीआई ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं और अभियोजन पूरी तरह वैध है।
बताया जाता है कि लालू यादव पर आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने रांची और पुरी स्थित रेलवे होटलों को आईआरसीटीसी को ट्रांसफर किया और उनके संचालन के लिए टेंडर जारी किए। आरोप है कि ये होटल कोचर बंधुओं की कंपनी सुजाता होटल को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आवंटित किए गए।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत कुल 16 लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।

