नारी शक्ति को सम्मान: केरल की दो महिला खादी बुनकरों को गणतंत्र दिवस परेड का विशेष आमंत्रण
नई दिल्ली / कन्नूर।
भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा और मेहनतकश बुनकरों को इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष सम्मान मिलने जा रहा है। केरल के कन्नूर जिले की दो महिला खादी बुनकरों — बिंदु और एलिजाबेथ — को 26 जनवरी 2026 को राजधानी दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए विशेष आमंत्रण मिला है। यह न केवल इन महिलाओं के लिए, बल्कि पूरे खादी सेक्टर के लिए गर्व का क्षण है।
पय्यन्नूर फरका ग्राम उद्योग संघ की चेरुपुझा कुंडमथडम यूनिट में कार्यरत बिंदु और एलिजाबेथ को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा चयनित किया गया है। खास बात यह है कि केरल से चुने गए चार बुनकरों में से दो इसी यूनिट से हैं।
सालों की मेहनत को मिली राष्ट्रीय पहचान
धागों के साथ वर्षों से अपने सपनों को बुन रहीं इन महिलाओं के लिए यह आमंत्रण किसी सम्मान से कम नहीं है।
बिंदु, जो पिछले 16 वर्षों से खादी क्षेत्र से जुड़ी हैं, और एलिजाबेथ, जिनका 13 वर्षों का अनुभव है, दोनों इस उपलब्धि को अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानती हैं।
एलिजाबेथ बताती हैं कि जब खादी कमीशन से पहला फोन आया, तो उन्हें लगा कि यह किसी सामान्य बैठक के लिए होगा। लेकिन ओरिएंटेशन क्लास में पहुंचने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वे गणतंत्र दिवस परेड की विशेष अतिथि बनकर दिल्ली जा रही हैं। उनके लिए यह नए साल का सबसे बड़ा तोहफा है।
चुनौतियों के बावजूद कायम खादी की परंपरा
कुंडमथडम यूनिट में कुल 57 कारीगर कार्यरत हैं। इनमें कुछ महिलाएं घर से धागा लपेटने का काम करती हैं, जबकि अन्य यूनिट में बुनाई करती हैं। एक मीटर कपड़ा बुनने पर उन्हें लगभग 70 रुपये की मजदूरी मिलती है। कम मेहनताना और सीमित संसाधनों के बावजूद, इन कारीगरों का अपने काम के प्रति समर्पण उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
बिंदु बताती हैं कि अच्छी गुणवत्ता के धागे और करघे की मदद से एक दिन में 7 से 8 मीटर तक कपड़ा बुना जा सकता है। दोनों महिलाओं का मानना है कि यदि मजदूरी समय पर मिले, तो यह आजीविका का एक स्थिर और सम्मानजनक साधन बन सकता है।
प्रधानमंत्री के पसंदीदा ‘मनीला’ कपड़े की बुनकर
इस उपलब्धि को और खास बनाता है यह तथ्य कि बिंदु और एलिजाबेथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा ‘मनीला’ शर्ट के कपड़े भी बुनती हैं।
पडिचल, कुंडमथडम और मंजाकड खादी केंद्रों में बुने गए कपड़ों से मनीला शर्ट तैयार की जाती है, जिसमें तीन अलग-अलग रंगों के धागों का इस्तेमाल होता है। प्रधानमंत्री के केरल दौरे के दौरान उन्हें भेंट किया गया मनीला कपड़ा भी इन्हीं महिलाओं के हाथों से बुना गया था।
दिल्ली जाने को लेकर परिवारों में उत्साह
बिंदु अपने बेटे जिष्णु (आईटीआई पास) के साथ, जबकि एलिजाबेथ अपने पति जॉर्ज के साथ 22 जनवरी को दिल्ली के लिए रवाना होंगी। गणतंत्र दिवस परेड को नजदीक से देखने और प्रधानमंत्री को सुनने का अवसर उन्हें बेहद उत्साहित कर रहा है।
देश की ओर से आम मेहनतकश महिलाओं को मिला यह सम्मान न केवल उनकी मेहनत का फल है, बल्कि खादी और हथकरघा उद्योग के लिए भी नई ऊर्जा और पहचान लेकर आया है।

