लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर घमासान: अमित शाह बनाम अखिलेश, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली, 16 अप्रैल। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। लोकसभा में पेश किए गए तीन अहम विधेयकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी देखने को मिली।
केंद्र सरकार ने ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026’, ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक 2026’ पेश किए हैं। इनका उद्देश्य नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करना है, जिसके तहत लोकसभा सीटों में वृद्धि और महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जाना प्रस्तावित है।
पीएम मोदी का विपक्ष पर निशाना
सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि यह विधेयक देशहित में है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष समर्थन करता है तो सरकार उन्हें इसका पूरा श्रेय देने को तैयार है।
समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव के बयान पर हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अखिलेश मेरे मित्र हैं, कभी-कभी मेरी मदद कर देते हैं।”
अमित शाह का सख्त रुख
इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों में कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया कि नए प्रस्ताव के बाद सीटों में बढ़ोतरी होगी।
अखिलेश और सपा का विरोध
वहीं अखिलेश यादव की पार्टी समाजवादी पार्टी ने विधेयकों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन के जरिए क्षेत्रीय असंतुलन पैदा कर रही है।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन परिसीमन के जरिए भेदभाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण देने की मांग उठाई।
सदन में हंगामा और नारेबाजी
बहस के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी की, जिससे सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सरकार का भरोसा
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विश्वास जताया कि यह विधेयक अंततः सर्वसम्मति से पारित हो जाएगा और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
क्या है विवाद की जड़?
विवाद का मुख्य कारण महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना है। विपक्ष को आशंका है कि इससे कुछ राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है, जबकि सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र और मजबूत होगा।
तीन दिवसीय इस विशेष सत्र में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

