सुप्रीम कोर्ट से लालढांग–चिल्लरखाल मोटर मार्ग को बड़ी राहत, सड़क निर्माण का रास्ता साफ
उत्तराखंड के बहुप्रतीक्षित लालढांग–चिल्लरखाल मोटर मार्ग निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट से अहम फैसला आया है। अदालत ने इस परियोजना पर लगी रोक को हटा दिया है, जिससे वर्षों से अटके निर्माण कार्य के फिर से शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
सुनवाई के दौरान गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल कर क्षेत्रीय जनहित का पक्ष रखा। वहीं, नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज ने उनके अधिवक्ता के रूप में अदालत में प्रभावी पैरवी की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्टे समाप्त कर दिया।
वन क्षेत्र से गुजरता है मार्ग का अहम हिस्सा
करीब 11.5 किलोमीटर लंबी इस मोटर मार्ग परियोजना का 4.7 किलोमीटर हिस्सा सेंट्रल फॉरेस्ट एरिया से होकर गुजरता है। इसी वन क्षेत्र से संबंधित पर्यावरणीय स्वीकृतियों और आपत्तियों के चलते निर्माण कार्य पर रोक लगी थी। पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पहले अदालत ने कार्य रोक दिया था, जिससे स्थानीय लोगों को लंबे समय तक असुविधा झेलनी पड़ी।
यह सड़क कोटद्वार को सीधे लालढांग से जोड़ेगी, जिससे हरिद्वार और मैदानी इलाकों तक पहुंच आसान होगी। फिलहाल लोगों को लंबा और घुमावदार मार्ग अपनाना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत होती है। बरसात के मौसम में भूस्खलन और जलभराव के कारण स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
18 गांवों की 40 हजार से अधिक आबादी को होगा लाभ
इस सड़क के निर्माण से करीब 18 गांवों और 40 हजार से अधिक लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच बाधित होती है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
परियोजना पूरी होने पर कृषि और दुग्ध उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा। साथ ही पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। छात्रों के लिए स्कूल और कॉलेज तक सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा।
जनप्रतिनिधियों ने बताया ऐतिहासिक फैसला
सांसद अनिल बलूनी ने अदालत में दायर याचिका के माध्यम से कहा कि यह सड़क केवल परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की जीवन रेखा है।
कोटद्वार विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से वे इस परियोजना को लेकर प्रयासरत थीं। शासन और संबंधित विभागों से लगातार संवाद और समन्वय के बाद यह सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
आगे की प्रक्रिया
राज्य सरकार और प्रशासन अब वन स्वीकृतियों से जुड़े शेष प्रक्रियात्मक कार्यों को शीघ्र पूरा कर निर्माण कार्य में तेजी लाने की तैयारी में हैं। उम्मीद है कि पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए यह परियोजना जल्द पूरी होगी और पहाड़ व मैदान के बीच संपर्क और मजबूत होगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।

