रुद्रप्रयाग जिले में अवैध भ्रूण लिंग जांच का एक गंभीर मामला सामने आया है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे नगरासू क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन ने एक फर्जी रेडियोलॉजिस्ट को गिरफ्तार किया है, जो चोरी-छिपे पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए भ्रूण के लिंग की जांच कर रहा था। आरोपी के पास से गर्भपात से जुड़ी दवाइयां और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है।
जानकारी के अनुसार, नगरासू क्षेत्र में एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों को लंबे समय से शक था। ग्रामीणों की सतर्कता के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, संदिग्ध दवाइयां और अन्य सामग्री बरामद हुई, जिससे अवैध भ्रूण लिंग जांच की पुष्टि हुई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी होटल और अस्थायी ठिकानों पर रुककर गुप्त रूप से यह गैरकानूनी कार्य करता था। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान उदय सिंह (69 वर्ष) के रूप में हुई है, जो खुद को बीएएमएस चिकित्सक बताता है और मूल रूप से झांसी, उत्तर प्रदेश का निवासी है। पुलिस के अनुसार आरोपी के पास न तो अल्ट्रासाउंड मशीन रखने का कोई वैध लाइसेंस था और न ही भ्रूण जांच करने की अनुमति।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति आरोपी की शैक्षणिक योग्यता, दस्तावेजों और पूर्व में की गई गतिविधियों की विस्तृत जांच करेगी। नगरासू चौकी प्रभारी सूरज कंडारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
वहीं जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि फर्जी रेडियोलॉजिस्ट की शिकायत मिलते ही प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। आरोपी के पास से गर्भपात से संबंधित सामग्री भी बरामद हुई है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। प्रशासन द्वारा इस पूरे नेटवर्क की भी जांच की जा रही है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है।
क्या है पीसीपीएनडीटी एक्ट?
पीसीपीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) एक्ट का उद्देश्य भ्रूण लिंग जांच पर रोक लगाकर गिरते लिंगानुपात को सुधारना है। इस कानून के तहत गर्भधारण से पहले या गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के लिंग की जांच पूरी तरह प्रतिबंधित है। अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग केवल पंजीकृत केंद्रों और अधिकृत चिकित्सकों द्वारा ही किया जा सकता है। कानून का उल्लंघन करने पर दोषी को तीन से पांच वर्ष तक की सजा, जुर्माना और चिकित्सकीय पंजीकरण रद्द किए जाने का प्रावधान है।

