देहरादून में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की अहम बैठक, समस्याओं के त्वरित समाधान के दिए निर्देश
देहरादून। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना (केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के दर्जा प्राप्त) की अध्यक्षता में मंगलवार को ओएनजीसी के सामुदायिक भवन में अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सीधे आयोग के समक्ष रखीं।
बैठक का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदाय के हितों से जुड़े मुद्दों को समझना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
समाज के उत्थान के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मकवाना
अपने संबोधन में अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान, उनके अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वस्त किया कि बैठक में प्राप्त सभी शिकायतों और सुझावों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
बीजापुर गेस्ट हाउस में हुई समीक्षा बैठक
इसी क्रम में बीजापुर गेस्ट हाउस में गृह विभाग और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण से जुड़े मामलों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में आईजी पुलिस श्री भरने, समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव प्रकाश चंद्र, उत्तराखंड शासन के अधिकारी जी.आर. नौटियाल, प्रभारी निदेशक समाज कल्याण विभाग तथा उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पीड़ितों को आर्थिक सहायता में नहीं होगी कमी
बैठक के दौरान समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव ने जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार के पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने के लिए अग्रिम धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मद में बजट की कोई कमी नहीं है और जरूरतमंदों को समय पर सहायता सुनिश्चित की जा रही है।

पुलिस को दिए सख्त निर्देश
अध्यक्ष किशोर मकवाना ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति उत्पीड़न से जुड़े सभी मामलों की जांच क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर के अधिकारी द्वारा कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और संयुक्त रिपोर्ट समयबद्ध तरीके से तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजी जाए, ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता मिल सके।
संवेदनशीलता और तत्परता से करें कार्यवाही
मकवाना ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के अधिकारों की रक्षा और उन्हें शीघ्र न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे हर मामले में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और तत्परता के साथ कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने में किसी प्रकार की देरी न हो।
जनसुनवाई से बढ़ी उम्मीदें
इस बैठक और जनसुनवाई कार्यक्रम से अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों में उम्मीद जगी है कि उनकी समस्याओं का समाधान अब तेजी से होगा।
सरकार और आयोग के इस संयुक्त प्रयास को सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

