अचानक बदला मंदाकिनी नदी का रंग, केदारघाटी में फैली दहशत; जांच में सामने आई बड़ी वजह
रुद्रप्रयाग/केदारघाटी। मंदाकिनी नदी का रंग अचानक मटमैला होने से मंगलवार सुबह केदारघाटी में हड़कंप मच गया। तेज बहाव और बदले हुए पानी को देखकर स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई और किसी बड़ी अनहोनी की आशंका जताई जाने लगी।
बैराज के गेट खुलते ही बदला नजारा
जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 7:30 बजे सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना के तहत कुंड बैराज के सभी गेट खोल दिए गए। इसके बाद नदी का जलस्तर और बहाव अचानक बढ़ गया।
हालांकि प्रशासन द्वारा पहले से सूचना दी गई थी, लेकिन जैसे ही मटमैला पानी तेजी से बहता दिखा, लोगों में घबराहट फैल गई।
निर्माण मलबा बना मुख्य कारण
जांच में सामने आया कि केदारनाथ हाईवे और आसपास चल रहे निर्माण कार्यों का मलबा नदी किनारों पर डाला जा रहा था। बैराज के गेट खुलते ही यही मलबा तेज बहाव के साथ नदी में बह गया, जिससे पानी का रंग बदल गया और स्थिति भयावह नजर आने लगी।
विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र बद्री ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि नदियों में मलबा डालना जलीय जीवन और पूरे पर्यावरण तंत्र के लिए खतरनाक है।
उन्होंने चेतावनी दी कि बरसात के दौरान यही मलबा बड़ी आपदा का कारण बन सकता है और हालात विनाशकारी हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ गई है। लोगों ने मांग की है कि—
- नदी किनारे मलबा डालने पर तुरंत रोक लगे
- जिम्मेदार एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई हो
- भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए ठोस कदम उठाए जाएं
फिर उठे पर्यावरणीय लापरवाही पर सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर केदारघाटी में निर्माण कार्यों और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में बड़ी आपदा से इंकार नहीं किया जा सकता।

