देहरादून- ग्राफिक एरा के फिल्म फेस्टिवल ‘हिमप्रवाह 3.0’ में ‘छौँ’ बनी बेस्ट फिक्शन फिल्म
प्रज्ञा थपलियाल को बेस्ट डायरेक्टर का पुरस्कार, अभिलाष झा और ईरा चुने गए बेस्ट मेल और फीमेल परफॉर्मर
देहरादून, 5 नवंबर। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के दो दिवसीय इंटरनेशनल ओपन एयर फिल्म फेस्टिवल ‘हिमप्रवाह 3.0’ में प्रज्ञा थपलियाल की फिल्म ‘छौँ’ को बेस्ट फिक्शन फिल्म का अवॉर्ड दिया गया। वहीं, बेस्ट मेल परफॉर्मर का खिताब अभिलाष झा और बेस्ट फीमेल परफॉर्मर का पुरस्कार ईरा ने अपने नाम किया।
फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार की मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह ने कहा कि पत्रकारिता और जनसंचार का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। पत्रकारिता, जनसंपर्क और विज्ञापन के साथ अब फिल्म, टेलीविजन, ओटीटी और डिजिटल मीडिया भी संचार के महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। यूट्यूब, रील्स और शॉर्ट फिल्मों ने पारंपरिक संचार माध्यमों को नया स्वरूप दिया है। ऐसे में छात्रों के लिए फिल्म निर्माण और डॉक्यूमेंट्री की बारीकियों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री युवाओं को रोजगार और रचनात्मकता के नए अवसर दे रही है।
फिक्शन श्रेणी में ‘छौँ’ को मिले कई पुरस्कार
फिक्शन श्रेणी में मयंक पाना की फिल्म ‘इट इज पॉसिबल’ रनर-अप रही। बेस्ट डायरेक्टर फिक्शन का पुरस्कार भी ‘छौँ’ के लिए प्रज्ञा थपलियाल को दिया गया। वहीं, ‘बियोंड दैट एंड’ के लिए अभिलाष झा को बेस्ट सिनेमैटोग्राफर और ‘द ऑथरली’ के लिए अखिल धामा को बेस्ट एडिटर का पुरस्कार मिला।
‘बियोंड दैट एंड’ के लिए ईरा को बेस्ट फीमेल परफॉर्मर और ‘इट इज पॉसिबल’ के लिए अभिलाष झा को बेस्ट मेल परफॉर्मर चुना गया। ‘हीर रांझा’ को बेस्ट स्क्रिप्ट का पुरस्कार दिया गया।
डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में ‘उड़ान’ रही अव्वल
डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में अब्दुल सामी और हैदर अली की फिल्म ‘उड़ान’ को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि आदित्य की फिल्म ‘एमएक्स’ रनर-अप रही।
तुर्की की शॉर्ट फिल्म ‘रिदम ऑफ बैलेंस’ को बेस्ट डायरेक्टर डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार दिया गया। ‘क्वानू’ के लिए अभिजीत नेगी को बेस्ट सिनेमैटोग्राफर और ‘समवन स्टील लव्स यू’ के लिए विग्नेश गायकवाड़ को बेस्ट एडिटर डॉक्यूमेंट्री चुना गया।
तरुण बिष्ट के रैप ने बांधा समां
फेस्टिवल के दूसरे दिन गढ़-कुमाऊं के रैप आर्टिस्ट तरुण बिष्ट ने अपनी दमदार प्रस्तुति से गढ़वाली और कुमाऊंनी संस्कृति की छाप छोड़ी। इस दौरान दिव्या रावत की ‘कालरेखा’, अभिजीत नेगी की ‘क्वानू’, मयंक पाना की ‘इट इज पॉसिबल’, राहुल जोशी की ‘वीरा’, सक्षम शर्मा और सौम्या चौधरी की ‘नंदा लौटेगी’, वैभव पुंडीर की ‘सीमांत’, दीपक वर्मा की ‘द फियरलेस जेंडर’ और ए.बी.एस. की ‘उड़ान’ सहित कई शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई।
इस फिल्म फेस्टिवल का आयोजन विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ मीडिया एंड मास कम्युनिकेशन ने उत्तराखंड फिल्म डेवलपमेंट काउंसिल और स्टाइलिंग पार्टनर लाइमलोड के सहयोग से किया। जूरी में अभिनेता कैलाश कंडवाल, फिल्म निर्माता एवं हिमफ्लिक्स के संस्थापक राहुल रावत और निर्देशक संतोष सिंह शामिल रहे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तबस्सुम नकवी, कुलसचिव डॉ. ज्योति छाबड़ा, विभागाध्यक्ष डॉ. अभिषेक कुमार सिंह सहित डॉ. ताहा सिद्दकी, डॉ. हिमानी बिंजोला, डॉ. अंकिता उनियाल, संदीप भट्ट, गिरिजा शंकर सेमवाल, अस्मिता बडोनी, अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मयंक पाना और साक्षी भंडारी ने किया।


