देहरादून: ग्राफिक एरा में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए ‘समन्वय’ एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू
देहरादून, 16 मार्च। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कार्यकुशलता, कार्यप्रबंधन क्षमता और संवाद कौशल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पांच दिवसीय एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम ‘समन्वय’ का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों को पेशेवर रूप से अधिक सक्षम बनाना और संस्थान की कार्यसंस्कृति को मजबूत करना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में ओएनजीसी, देहरादून के कॉर्पोरेट एडमिनिस्ट्रेशन हेड नीरज कुमार शर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी संस्थान की सफलता के लिए अनुशासन और नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक होता है। अनुशासित कार्यशैली न केवल कार्यकुशलता को बढ़ाती है, बल्कि एक सकारात्मक और प्रभावी कार्यसंस्कृति का निर्माण भी करती है।
इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की असली ताकत उसके गैर-शैक्षणिक कर्मचारी होते हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर संस्थान के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कर्मचारियों को निरंतर सीखने, अपने कौशल को विकसित करने और समर्पण के साथ संस्थान के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
पांच दिवसीय इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें पेशेवर व्यवहार, कार्यस्थल पर भावनात्मक संतुलन बनाए रखना, शिकायतों और समस्याओं के प्रभावी समाधान की प्रक्रिया, कार्य प्रणाली की बेहतर समझ तथा कैरियर विकास के अवसर जैसे विषय शामिल हैं। इस प्रशिक्षण के माध्यम से कर्मचारियों को आधुनिक कार्यस्थल की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा।
इस एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के पर्सनालिटी डेवलपमेंट डिपार्टमेंट और ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, पीडीपी विभाग की प्रमुख डॉ. साक्षी गुप्ता, एचआरडीसी के निदेशक डॉ. अभिषेक शर्मा, डॉ. बी.एस. बिष्ट, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. भारती शर्मा और श्वेता बजाज सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्मचारियों के व्यक्तित्व विकास और संस्थान की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

