देहरादून- वैज्ञानिक उपलब्धि के लिए डॉ. संजीत सिंह कैंतुरा सम्मानित, सैनिक संगठन ने मनाया 33वां स्थापना दिवस
देहरादून, 23 अगस्त 2026। उत्तराखंड भूतपूर्व सैनिक-अर्धसैनिक संयुक्त संगठन ने अपना 33वां स्थापना दिवस गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया। कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों और अर्धसैनिक परिवारों को एकजुट करने, उनके हितों और सम्मान के लिए कार्य करने तथा सैनिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को आगे बढ़ाने के संकल्प को दोहराया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि सुरेंद्र सिंह पांगती (आईएएस, पूर्व मंडलायुक्त, गढ़वाल मंडल) मौजूद रहे। कार्यक्रम में कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल, राज्यमंत्री सैनिक कल्याण, उत्तराखंड, डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला, कैप्टन (सेवानिवृत्त) भगत सिंह राणा, पूर्व सैनिक डॉ. शूरबीर सिंह बिष्ट, हवलदार (सेवानिवृत्त) सैन सिंह पंवार, प्रदीप कैंतुरा, अजीत कैंतुरा सहित संगठन के अनेक पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए डॉ. संजीत सिंह कैंतुरा का सम्मान
समारोह में वैज्ञानिक क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए डॉ. संजीत सिंह कैंतुरा को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सैनिक परिवार की समृद्ध विरासत से निकलकर विज्ञान और शोध के क्षेत्र में पहचान बनाने वाली उनकी यात्रा को इस सम्मान का विशेष आधार बताया गया।
डॉ. कैंतुरा ने प्रायोगिक नाभिकीय भौतिकी (Experimental Nuclear Physics) में शोध के माध्यम से योगदान दिया है। उनका शोध कार्य पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता, रेडिएशन डिटेक्शन, उन्नत परमाणु उपकरण और रेडियोलॉजिकल स्वास्थ्य जोखिम आकलन जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है।
उनके शोध का प्रमुख फोकस मिट्टी में प्राकृतिक रूप से मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों की सांद्रता और वितरण को समझना तथा अलग-अलग भूमि उपयोग और भौगोलिक परिस्थितियों में उनसे जुड़े संभावित विकिरण जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन करना रहा है।
डॉ. कैंतुरा ने आईआईटी रोपड़ में कम-स्तरीय रेडियोधर्मिता और रेडिएशन बैकग्राउंड स्टडीज के लिए लो-बैकग्राउंड गामा स्पेक्ट्रोस्कोपी सेटअप के विकास में भी योगदान दिया। इसमें GEANT4 आधारित मॉडल ने 80.9–1408 keV ऊर्जा रेंज में प्रयोगात्मक परिणामों के साथ 93 प्रतिशत कॉन्फिडेंस स्तर पर अच्छा सामंजस्य प्रदर्शित किया।

सैनिक विरासत से वैज्ञानिक उपलब्धि तक का सफर
संगठन की वार्षिक पत्रिका ‘सैनिक दर्पण’ में डॉ. संजीत सिंह कैंतुरा की जीवन यात्रा पर ‘सैनिक विरासत से वैज्ञानिक उपलब्धि तक: डॉ. संजीत सिंह कैंतुरा की कहानी’ शीर्षक से विशेष लेख प्रकाशित किया गया है।
लेख के अनुसार, डॉ. कैंतुरा के परिवार की कई पीढ़ियों ने सेना में सेवा की है। उनके परदादा जमादार दौलत सिंह कैंतुरा ने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा की थी। इसी सैनिक परंपरा से मिले अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रसेवा की भावना को आगे बढ़ाते हुए डॉ. कैंतुरा ने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
‘सैनिक दर्पण’ के संपादक एवं हवलदार (सेवानिवृत्त) सैन सिंह पंवार की भूमिका भी इस प्रेरक जीवन यात्रा को सामने लाने में महत्वपूर्ण रही। पत्रिका के माध्यम से सैनिक परिवारों की प्रतिभाओं और उनकी उपलब्धियों को समाज तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सम्मान को बताया प्रेरणा और जिम्मेदारी
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. संजीत सिंह कैंतुरा ने संगठन के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से हवलदार (सेवानिवृत्त) सैन सिंह पंवार के प्रति धन्यवाद जताया।
डॉ. कैंतुरा ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा और जिम्मेदारी दोनों है। सैनिक समाज का स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास उन्हें राष्ट्र एवं समाज के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सैनिक विरासत, अनुशासन, वैज्ञानिक जिज्ञासा और निरंतर परिश्रम का यह संगम युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

