देहरादून में कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों पर रहेगी विशेष नजर, 218 अल्ट्रासाउंड केंद्रों की होगी निगरानी
मानक पूरे करने पर ही मिलेगा अल्ट्रासाउंड केंद्रों को पंजीकरण
बैठक में 10 नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण और 18 केंद्रों के नवीनीकरण के आवेदनों पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अनुमति देने से पहले सभी जरूरी प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों की जांच की जाए।
इसके तहत उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाणपत्र, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की अनापत्ति, अग्निशमन सुरक्षा प्रमाणपत्र और जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण संबंधी अनुबंध की जांच अनिवार्य होगी। डीएम ने कहा कि निर्धारित मानक पूरे करने वाले केंद्रों को ही पंजीकरण या नवीनीकरण की अनुमति दी जाए। आवश्यक दस्तावेजों की कमी होने पर अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस साल 117 केंद्रों का निरीक्षण, तीन की मशीनें सील
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में वर्तमान में 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्र हैं, जिनमें 420 अल्ट्रासाउंड मशीनें स्थापित हैं। जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन समिति ने सितंबर में 84 केंद्रों और वर्ष 2026 में अब तक कुल 117 केंद्रों का निरीक्षण किया है। मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर तीन केंद्रों की मशीनें सील की गई हैं।
सीएमओ के अनुसार, जिले का लिंगानुपात इस वर्ष 927 से बढ़कर 937 हुआ है। हालांकि, क्षेत्रवार आंकड़ों में डोईवाला और कालसी की स्थिति चिंताजनक बताई गई।
डोईवाला और कालसी में सबसे कम लिंगानुपात
वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों का लिंगानुपात इस प्रकार दर्ज किया गया है:
- डोईवाला: 885
- कालसी: 887
- सहसपुर: 924
- रायपुर: 949
- विकासनगर: 1000
- चकराता: 1060
इन आंकड़ों के आधार पर कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों की पहचान कर निगरानी और सुधारात्मक कार्रवाई पर जोर दिया जाएगा।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, पीसीपीएनडीटी के जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बिमलेश जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार, वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट, जिला शासकीय अधिवक्ता सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


