देहरादून महायोजना-2041 के आठवें दिन उमड़ी जनभागीदारी
देहरादून। राजधानी देहरादून के सुनियोजित और सतत विकास की दिशा तय करने वाली देहरादून महायोजना-2041 को जनभागीदारी के आधार पर अंतिम रूप देने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा चलाया जा रहा जनसंवाद अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। अभियान के आठवें दिन बुधवार को लीची बाग, 4 न्यू कैंट रोड, दिलाराम चौक में आयोजित जनसुनवाई शिविर में स्थानीय नागरिकों, भू-स्वामियों, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर महायोजना से जुड़े अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराईं।
जनसुनवाई के दौरान नागरिकों ने शहर में बढ़ते शहरीकरण, यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, जल निकासी, हरित क्षेत्रों के संरक्षण, सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार और भविष्य की विकास आवश्यकताओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। एमडीडीए के अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उनका विधिवत अभिलेखीकरण किया।
जनसंवाद से आकार ले रही है देहरादून महायोजना-2041
एमडीडीए द्वारा तैयार की जा रही महायोजना-2041 का उद्देश्य केवल भूमि उपयोग तय करना नहीं, बल्कि अगले डेढ़ दशक के लिए देहरादून के संतुलित, व्यवस्थित और टिकाऊ विकास का व्यापक रोडमैप तैयार करना है। इसी उद्देश्य से प्राधिकरण विभिन्न सेक्टरों में पहुंचकर नागरिकों से सीधे संवाद कर रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि महायोजना में आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत, औद्योगिक एवं हरित क्षेत्रों के संतुलित विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, बेहतर परिवहन व्यवस्था और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। तेजी से बढ़ती आबादी और बदलती शहरी आवश्यकताओं को देखते हुए नागरिकों के सुझाव महायोजना को अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सड़क, ट्रैफिक और पार्किंग जैसे मुद्दों पर खुलकर हुई चर्चा
जनसुनवाई शिविर में नागरिकों ने सड़क चौड़ीकरण, ट्रैफिक जाम, पार्किंग संकट, जलभराव, ड्रेनेज सिस्टम, सार्वजनिक परिवहन और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
कई लोगों ने पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित मार्ग विकसित करने, खुले एवं हरित क्षेत्रों को संरक्षित रखने तथा तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के सुझाव दिए।
वहीं भू-स्वामियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भूमि उपयोग, विकास नियंत्रण नियमों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत किए। तकनीकी टीम ने सभी सुझावों को रिकॉर्ड करते हुए भरोसा दिलाया कि प्रत्येक सुझाव का तकनीकी एवं विधिक परीक्षण किया जाएगा।
21 जुलाई तक जारी रहेगा जनसंवाद अभियान
एमडीडीए द्वारा 6 जुलाई से 21 जुलाई 2026 तक शहर के विभिन्न सेक्टरों में जनसुनवाई शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को महायोजना निर्माण प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना है, ताकि भविष्य का देहरादून स्थानीय आवश्यकताओं, जनभावनाओं और सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप विकसित किया जा सके।
प्राधिकरण ने नागरिकों, व्यापारिक संगठनों, संस्थाओं और भू-स्वामियों से अधिक से अधिक संख्या में जनसुनवाई शिविरों में भाग लेकर अपने सुझाव दर्ज कराने की अपील की है।
जनभागीदारी से ही बनेगा भविष्य का देहरादून : बंशीधर तिवारी
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल एक तकनीकी दस्तावेज नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की विकास दृष्टि है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का प्रयास है कि यह योजना नागरिकों की अपेक्षाओं, स्थानीय जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझाव महायोजना को अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बनाने में मदद कर रहे हैं तथा प्रत्येक नागरिक की भागीदारी भविष्य के सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक देहरादून के निर्माण में महत्वपूर्ण होगी।
हर सुझाव का होगा गंभीर परीक्षण : मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा सभी प्रकरणों का तकनीकी एवं विधिक परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य ऐसी महायोजना तैयार करना है जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए आने वाले वर्षों में देहरादून की आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।

