देहरादून में वकीलों का हल्ला बोल: घंटाघर पर चक्का जाम, चेंबर निर्माण को लेकर सरकार को कड़ी चेतावनी
देहरादून में चेंबर निर्माण की मांग को लेकर कई दिनों से शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे वकीलों ने अब अपना रुख कड़ा कर दिया है। शनिवार को अधिवक्ताओं ने हरिद्वार रोड से लेकर प्रिंस चौक, गांधी रोड और दर्शन लाल चौक होते हुए घंटाघर तक विशाल मार्च निकाला। घंटाघर पहुंचकर वकीलों ने सड़क जाम कर सरकार को चेताया कि यदि उनकी मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
कोर्ट परिसर में कामकाज ठप
वकीलों के विरोध के चलते शनिवार को कोर्ट परिसर में बस्ता, टाइपिंग और स्टांप वेंडरों की सेवाएँ पूरी तरह बंद रहीं। रजिस्ट्रार ऑफिस भी बंद होने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूर-दूर से रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
चेंबर निर्माण को लेकर वकीलों की नाराजगी
देहरादून बार एसोसिएशन का कहना है कि जिला जज न्यायालय परिसर में रैन बसेरा बनाए जाने का निर्णय गलत है। अधिवक्ताओं का तर्क है कि कोर्ट परिसर में 5,000 वकीलों, लगभग उतने ही टाइपिस्ट और वेंडरों की मौजूदगी के बावजूद कार्यस्थल बेहद कम है। ऐसे में रैन बसेरा की जगह चेंबर निर्माण होना जरूरी है।
अधिवक्ताओं ने यह भी मांग रखी है कि सिविल कंपाउंड, हरिद्वार रोड की भूमि को भी चेंबर निर्माण के लिए उपलब्ध कराया जाए। 11 नवंबर से अधिवक्ता इन मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं और न्यायिक कार्यों से विरत हैं।
18 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन, अब चेतावनी
वकीलों का कहना है कि 18 दिनों से शांतिपूर्वक आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। इससे नाराज होकर आज उन्होंने घंटाघर पर चक्का जाम किया। उनका कहना है कि यदि चेंबर की मांग जल्द पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन और भी कठोर होगा।
पूर्व सीएम हरीश रावत का समर्थन
अधिवक्ताओं के इस आंदोलन को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का समर्थन भी मिला है। उन्होंने धरना स्थल पर पहुंचकर कहा कि वकीलों की मांग न्यायसंगत है और रैन बसेरा कोर्ट परिसर में बनाने की आवश्यकता नहीं है। रावत ने कहा कि सरकार को चेंबर निर्माण की मांग स्वीकार करनी चाहिए और व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।

