देहरादून में भारतीय पाक परंपरा और आधुनिक प्रस्तुति का खूबसूरत संगम देखने को मिला, जब मशहूर शेफ और टीवी पर्सनैलिटी हरपाल सिंह सोखी ने राजधानी में एक लाइव क्यूलिनरी मास्टर क्लास का आयोजन किया। यह शाम सिर्फ खाना बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय स्वाद, यादों और स्ट्रीट फूड संस्कृति का एक जीवंत उत्सव बन गई।
इस विशेष मास्टर क्लास को लाइव और इंटरैक्टिव अंदाज़ में आयोजित किया गया, जिसमें भोजन प्रेमी, मीडिया प्रतिनिधि और खास मेहमान शामिल हुए। शेफ हरपाल ने प्रतिभागियों के साथ मिलकर विभिन्न व्यंजन तैयार किए और हर डिश से जुड़ी दिलचस्प कहानियां भी साझा कीं। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह पारंपरिक स्वादों को आधुनिक प्लेटिंग और तकनीकों के साथ संतुलित किया जा सकता है। पूरा मेनू उनकी भारत भर की निजी फूड जर्नी की झलक पेश करता नजर आया।
बनारस के घाटों की याद दिलाने वाली ‘दीनानाथ की टमाटर चाट’ से लेकर छोले-कुल्चे और पकौड़े पॉकेट्स तक, हर व्यंजन के पीछे बचपन और शहरों की गलियों की कहानियां छिपी थीं। शेफ हरपाल ने लुधियाना की स्ट्रीट फूड संस्कृति से जुड़ी अपनी यादों को भी दर्शकों के साथ साझा किया। वहीं, जलेबी वाफ़ल्स के जरिए पारंपरिक भारतीय मिठाई को एक नया, आधुनिक और गॉरमेट रूप दिया गया, जिसने सभी को खासा आकर्षित किया।
मेहमानों के लिए एक खास बुफे भी सजाया गया, जिसमें दाल मखनी, कढ़ाही पनीर, पालक मेथी, सब्ज़ बिरयानी, विभिन्न प्रकार की इंडियन ब्रेड्स और मिर्चा वाला हलवा जैसी पारंपरिक डिशेज़ शामिल थीं। पेय पदार्थों में क्षेत्रीय भारतीय ड्रिंक्स को जगह दी गई, खासतौर पर बेला-चमेली शरबत, जो बीकानेर के पारंपरिक कारीगरों और स्थानीय दुकानों की विरासत को समर्पित था।
मास्टर क्लास के बारे में बात करते हुए शेफ हरपाल सिंह सोखी ने कहा कि उनके लिए खाना केवल रेसिपी नहीं, बल्कि लोगों, जगहों और यादों का मेल है। देहरादून में हुई यह मास्टर क्लास उन्हीं कहानियों को थाली तक लाने की एक कोशिश थी। बनारस से पंजाब तक की यह स्वाद यात्रा, दर्शकों के साथ मिलकर खाना बनाना और भारतीय कारीगरों की कला को सम्मान देना, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद ढोल की थाप पर शेफ हरपाल की शानदार एंट्री ने माहौल को और जीवंत बना दिया। लाइव कुकिंग सेशंस, दर्शकों की सक्रिय भागीदारी और एक खास मीट-एंड-ग्रीट सेशन ने इस शाम को और यादगार बना दिया। मेहमानों ने भोजन को उसी रूप में अनुभव किया, जैसा उसका असली आनंद होता है—ताज़ा बना हुआ और सबके साथ बैठकर साझा किया गया।
देहरादून की यह क्यूलिनरी मास्टर क्लास भारतीय पाक विरासत को संजोने और उसे नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुई। कार्यक्रम का समा

