देहरादून के लोक भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने ‘भीष्म’ (भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच) का औपचारिक शुभारंभ किया। इस दौरान ‘भीष्म’ का आधिकारिक लोगो और वेबसाइट भी लॉन्च की गई। यह मंच उत्तराखंड, विशेषकर देहरादून को रणनीतिक चिंतन और राष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
क्या है ‘भीष्म’?
‘भीष्म’ एक रणनीतिक थिंक टैंक (Strategic Think Tank) है, जिसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र से जुड़े सामरिक, भू-राजनीतिक, पर्यावरणीय, सुरक्षा और विकास संबंधी मुद्दों पर गंभीर अध्ययन, शोध और संवाद को बढ़ावा देना है। इस मंच के माध्यम से देहरादून में मौजूद सैन्य, प्रशासनिक, शैक्षणिक और नीति-निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुभव और ज्ञान को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ जुड़े
इस मंच की फाउंडर टीम से देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान और लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त), जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं, जुड़े हैं। इनके मार्गदर्शन में ‘भीष्म’ राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर गंभीर विमर्श को आगे बढ़ाएगा।
इसके अलावा मंच से जुड़े प्रमुख सदस्यों में कर्नल डॉ. गिरिजा शंकर मुंगली (सेवानिवृत्त), संजीव चोपड़ा (आईएएस, सेवानिवृत्त), प्रो. दुर्गेश पंत, प्रो. दीवान सिंह रावत, प्रो. सुरेखा डंगवाल, रक्षा विश्लेषक नितिन गोखले और राजन आर्य जैसे अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हैं। इन सभी का विविध क्षेत्रों में व्यापक अनुभव इस मंच को बौद्धिक मजबूती प्रदान करेगा।
क्या होगा फोकस?
‘भीष्म’ का मुख्य फोकस निम्न विषयों पर रहेगा:
- हिमालयी क्षेत्र की सामरिक चुनौतियां
- सीमा सुरक्षा और रक्षा रणनीति
- जल, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
- भू-राजनीतिक परिवर्तनों का प्रभाव
- नीति निर्माण में स्थानीय दृष्टिकोण की भागीदारी
इस मंच के जरिए सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, शोध प्रकाशन और नीति सुझाव तैयार किए जाएंगे, ताकि राज्य और केंद्र सरकार को रणनीतिक मामलों में सार्थक इनपुट मिल सके।
उत्तराखंड के लिए क्यों अहम?
देहरादून पहले से ही सैन्य संस्थानों, प्रशिक्षण अकादमियों और रणनीतिक अध्ययन केंद्रों का गढ़ रहा है। ‘भीष्म’ की स्थापना से उत्तराखंड को एक बौद्धिक और रणनीतिक हब के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। यह पहल न केवल राज्य के युवाओं और शोधार्थियों के लिए अवसर पैदा करेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विमर्श में हिमालयी दृष्टिकोण को भी सशक्त करेगी।
इस प्रकार ‘भीष्म’ उत्तराखंड को रणनीतिक चिंतन की नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभर रहा है।

