चारधाम यात्रा के लिए साढ़े 12 करोड़ मंजूर, 35 करोड़ की मांग के बीच तैयारियों को रफ्तार
उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। कपाट खुलने से पहले ही सरकार ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए साढ़े 12 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। हालांकि जिलों से कुल 35 करोड़ रुपये की मांग भेजी गई थी, ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या मौजूदा बजट से यात्रा को पूरी तरह सुगम और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
जिलों की मांग और सरकार की मंजूरी
यात्रा प्रशासन संगठन ने प्रमुख पड़ावों से प्रस्ताव मांगे थे। रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील जिलों ने भारी बजट की मांग रखी थी। अकेले रुद्रप्रयाग ने करीब 12 करोड़ रुपये की जरूरत बताई थी।
फिलहाल सरकार ने गढ़वाल मंडल के सातों जिलों को उनकी आवश्यकता और संवेदनशीलता के आधार पर राशि आवंटित की है। चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी को तीन-तीन करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं प्रवेश द्वार माने जाने वाले हरिद्वार, टिहरी और देहरादून को एक-एक करोड़ रुपये मिले हैं। सबसे कम आवंटन पौड़ी जिले को हुआ है। इसके अलावा यात्रा प्रशासन संगठन को समन्वय और मॉनिटरिंग के लिए अलग से एक करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं।
किन सुविधाओं पर होगा फोकस?
जारी बजट का मुख्य उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। इसमें—
- पेयजल आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था
- आधुनिक और स्वच्छ शौचालयों का निर्माण
- रात में यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए पथ-प्रकाश
- दुर्गम मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना
सरकार का दावा है कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में बजट में बढ़ोतरी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और यादगार अनुभव मिल सके।
चुनौती होगी बेहतर प्रबंधन
हालांकि 35 करोड़ की मांग के मुकाबले साढ़े 12 करोड़ की स्वीकृति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों के सामने सीमित संसाधनों में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल इस पहली किस्त ने तैयारियों को गति दे दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कम बजट में अधिकतम सुविधाएं कैसे विकसित की जाती हैं और इस बार की चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं के लिए कितनी सुगम और दिव्य साबित होती है।

