शनिवार को उत्तराखंड भाजपा की कोर ग्रुप बैठक कई मायनों में खास और चौंकाने वाली रही। बैठक में संगठन और सरकार से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, साथ ही आगामी चुनावी रणनीति की रूपरेखा भी तैयार की गई।
कई बड़े चेहरे रहे नदारद, केंद्रीय पर्यवेक्षक की मौजूदगी
इस बैठक में दो पूर्व मुख्यमंत्री— विजय बहुगुणा और तीरथ सिंह रावत— अनुपस्थित रहे। खास बात यह रही कि बैठक प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी की गैरमौजूदगी में संपन्न हुई।
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में शामिल हुए थे।
बैठक में शामिल प्रमुख नेता
बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, संगठन महामंत्री अजेय, सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद अनिल बलूनी, अजय टम्टा, माला राज्य लक्ष्मी शाह, अजय भट्ट, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल और कल्पना सैनी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, धन सिंह रावत और हरिद्वार से विधायक मदन कौशिक भी बैठक में शामिल हुए।
7 मार्च से शुरू होगा मंडल स्तर का प्रशिक्षण
बैठक के बाद महेंद्र भट्ट ने बताया कि 7 मार्च से 14 अप्रैल तक प्रदेश के सभी मंडलों में कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें संगठनात्मक विषयों, चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर की रणनीति पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सांसदों को भी इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।
17 फरवरी को देहरादून में प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग की कार्यशाला आयोजित होगी। उसी दिन मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सभी प्रांतीय पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों के साथ संवाद करेंगे। जिलों से ग्राउंड फीडबैक लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सरकार के चार साल पूरे होने पर बड़ा आयोजन
महेंद्र भट्ट ने बताया कि 23 मार्च को राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें डेढ़ से दो लाख कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रित करने की योजना है। तिथियों को अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही कोर कमेटी की बैठक होगी।
चुनावी रणनीति पर विशेष फोकस
बैठक में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, खासकर उन बूथों पर जहां पार्टी पिछली बार कमजोर रही, विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। मार्च के पहले सप्ताह में मोर्चों की संयुक्त बैठक भी आयोजित की जाएगी।
साथ ही, विधायकों की अलग बैठक कर इंटरनल सर्वे और जमीनी फीडबैक के आधार पर चुनावी रणनीति को धार दी जाएगी।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड भाजपा की यह कोर ग्रुप बैठक संगठनात्मक मजबूती, प्रशिक्षण अभियान और चुनावी तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

