राजकीय नर्सिंग कॉलेज सुरसिंधार में नए सत्र से शुरू होगा एमएससी कोर्स, 10 सीटों को मिली मंजूरी
टिहरी। उत्तराखंड सरकार ने टिहरी जनपद के राजकीय नर्सिंग कॉलेज सुरसिंधार में एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम शुरू करने को मंजूरी दे दी है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कॉलेज में स्नातकोत्तर (PG) कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाएगा। फिलहाल एमएससी नर्सिंग में कुल 10 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।
एमएससी पाठ्यक्रम को स्वीकृति मिलने से अब बीएससी नर्सिंग कर चुके छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें टिहरी में ही पीजी की सुविधा मिल सकेगी।
इन विषयों में मिलेंगी 10 सीटें
राजकीय नर्सिंग कॉलेज सुरसिंधार में एमएससी नर्सिंग के अंतर्गत निम्न विषयों में 2-2 सीटें निर्धारित की गई हैं—
- कम्युनिटी हेल्थ नर्सिंग
- ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी नर्सिंग
- मेडिकल सर्जिकल नर्सिंग
- चाइल्ड हेल्थ नर्सिंग
- मेंटल हेल्थ नर्सिंग
इन सभी विषयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पढ़ाई शुरू की जाएगी।
अगस्त 2025 में मिली थी प्रशासनिक स्वीकृति
गौरतलब है कि नर्सिंग कॉलेज सुरसिंधार में एमएससी पाठ्यक्रम शुरू करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मांग को स्वीकार करते हुए इसकी घोषणा की थी। इसके बाद 14 अगस्त 2025 को शासन की ओर से वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए थे।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति के बाद अब औपचारिक रूप से पीजी कक्षाओं के संचालन का रास्ता साफ हो गया है।
बीएससी नर्सिंग में पहले से 40 सीटें
वर्तमान में राजकीय नर्सिंग कॉलेज सुरसिंधार में बीएससी नर्सिंग की 40 सीटों पर अध्ययन कराया जा रहा है। अब एमएससी नर्सिंग की 10 सीटें जुड़ने से कॉलेज में उच्च शिक्षा की सुविधाएं और मजबूत होंगी।
क्या बोले चिकित्सा शिक्षा मंत्री
उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा—
“राज्य सरकार प्रदेश में उच्च स्तरीय और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नए मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना के साथ-साथ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के संचालन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि प्रदेश को कुशल और विशेषज्ञ मेडिकल स्टाफ मिल सके। इसी क्रम में राजकीय नर्सिंग कॉलेज टिहरी में एमएससी नर्सिंग कक्षाओं को मंजूरी दी गई है।”
इस फैसले से न केवल स्थानीय छात्रों को लाभ मिलेगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।

