सतोली गांव में बिल्डर को लाभ पहुंचाने का मामला गंभीर, जिला खनन अधिकारी को हाईकोर्ट में पेश होने के आदेश
नैनीताल। रामगढ़ ब्लॉक के सतोली गांव में ग्राम सभा की बोरिंग का पानी कथित तौर पर एक बिल्डर को पहुंचाए जाने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख़्त रुख अपनाया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जिला खनन अधिकारी को मंगलवार, 6 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
यह याचिका सतोली गांव के ग्रामीणों की ओर से दायर की गई है। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने जिला खनन अधिकारी से यह स्पष्ट करने को कहा था कि ग्राम सभा की बोरिंग का पानी किन-किन लोगों को आपूर्ति किया जा रहा है और इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। हालांकि निर्धारित समय तक रिपोर्ट पेश न किए जाने पर न्यायालय ने नाराज़गी जताते हुए अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि भवाली निवासी एक व्यक्ति ने प्रशासन से सतोली गांव में पानी की आपूर्ति के लिए अनुमति मांगी थी, जबकि उसका गांव में कोई मकान नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, बोरिंग का पानी गांव के बजाय ऊपर स्थित एक बिल्डर के कॉटेज तक पहुंचाया जा रहा है। जबकि पूरे क्षेत्र में पहले से ही स्वजल योजना के तहत पानी की लाइन उपलब्ध है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उक्त व्यक्ति को वर्ष 2011 में बोरिंग की अनुमति दी गई थी, लेकिन उस समय उसने बोरिंग नहीं कराई। अब करीब 10 साल बाद उसी पुरानी अनुमति के आधार पर दोबारा एनओसी मांगी गई। नैनीताल तहसील प्रशासन ने पुरानी अनुमति का हवाला देते हुए नए सिरे से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं समझी और बोरिंग की अनुमति दे दी, जबकि नियमों के अनुसार इस मामले में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य था।
उधम सिंह नगर में राशन घोटाले की सुनवाई, जांच रिपोर्ट 18 फरवरी तक पेश करने के आदेश
नैनीताल हाईकोर्ट में उधम सिंह नगर जिले में सस्ता गल्ला योजना के तहत 99 क्विंटल से अधिक अनाज के सड़ने और बाद में दोषियों पर की गई रिकवरी को माफ किए जाने के मामले में भी सुनवाई हुई। यह जनहित याचिका हरिद्वार निवासी अभिजीत द्वारा दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2021 में सस्ता गल्ला योजना के अंतर्गत वितरण के लिए रखा गया 99 क्विंटल से अधिक अनाज उचित रख-रखाव के अभाव में सड़ गया। मामले की जांच के बाद उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी ने दोषियों से रिकवरी के आदेश दिए थे, लेकिन बाद में खाद्य आपूर्ति आयुक्त द्वारा यह रिकवरी माफ कर दी गई।
राज्य सरकार की ओर से 5 दिसंबर को कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया गया कि कोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को समिति की जांच रिपोर्ट 18 फरवरी से पहले न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही और नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।

