दो दिवसीय मेले में लोक कलाकारों की शानदार प्रस्तुति, पर्यटन पर हुई विचार गोष्ठी
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेई जी को याद करते हुए विधिवत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मेले का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, लोक परंपराओं एवं सामाजिक समरसता की भावना को जन-जन तक पहुँचाना रहा। इस अवसर पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। लोक गायिका अर्चना सती, बीना बोरा एवं सौरभ मैठाणी की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन अनुज पुरोहित द्वारा किया गया।
मेले में स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत, नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियाँ, लोक नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा तथा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। साथ ही आत्मनिर्भर भारत की भावना को सशक्त करते हुए स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प एवं विभिन्न स्टॉलों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र निर्माण, भारतीय संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक जागरूकता एवं युवाओं को सकारात्मक दिशा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए गए। बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं युवाओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया ।
वीर बालक दिवस पर बच्चों द्वारा पेंटिंग और प्रदर्शनी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया
इसके अतिरिक्त शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इसी के साथ दो दिवसीय शरदोत्सव सांस्कृतिक मेला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। भगत सिंह कोशियारी ने संघ के वरिष्ठ लोगों को सम्मानित करते हुए संघ की यात्रा के बारे मे बताया ओर विश्व में संघ का क्या योगदान रहा उसके बारे मे बताया ।
समापन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड भगत सिंह कोश्यारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रमुख डॉ धनंजय , संस्था के अध्यक्ष सुभाष भट्ट, डॉ हरीश रावत, बलवंत सिंह बोरा, शोभा सुंदरम, ईरा कुकरेती, पूनम, नीतू, सविता भट्ट, गीता बागड़ी, प्रजापति नौटियाल, मितेश सेमवाल , डॉक्टर राकेश उनियाल, नीतू रावत, दीपिका रौतेला, प्रतिभा पाठक, डॉ राकेश डंगवाल, गीतांजलि , बंदना, आशा नेगी, ज्योतिका पांडे, वी के सुंदरम, आचार्य कृष्णा नन्द नौटियाल, पुष्पा भाकुनी, शर्मिष्ठा सहित आदि लोग उपस्थित रहे।

