दिल्ली की जहरीली हवा से राहत की तलाश, ऑक्सीजन लेने उत्तराखंड पहुंच रहे पर्यटक
नैनीताल–रामनगर–कॉर्बेट में तेजी से बढ़ी भीड़
दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों की सेहत पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। राजधानी दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 493 तक पहुंच चुका है, जो बेहद गंभीर श्रेणी में आता है। ऐसे हालात में दिल्लीवासी राहत की सांस लेने के लिए उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों का रुख कर रहे हैं। इसका सीधा असर नैनीताल, भीमताल, रामनगर और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र के पर्यटन पर साफ दिखाई देने लगा है।

एक-दो दिन नहीं, महीनों के लिए आ रहे लोग
दिल्ली और आसपास के इलाकों में AQI 400 के पार पहुंचने के बाद लोग सिर्फ वीकेंड ट्रिप ही नहीं, बल्कि एक से तीन महीने तक के लंबे प्रवास की बुकिंग करवा रहे हैं। नैनीताल जिले और कॉर्बेट क्षेत्र में होमस्टे और लॉन्ग-स्टे प्रॉपर्टीज की मांग तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर वे परिवार पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनके बुजुर्ग माता-पिता सांस, दमा और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित हैं।
“दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो गया है”
नैनीताल और कॉर्बेट पहुंचे पर्यटकों का कहना है कि दिल्ली में मौजूदा हालात में सांस लेना भी दूभर हो गया है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन, खांसी और सांस संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में कुछ समय के लिए प्रदूषण से दूर, साफ और शांत माहौल में रहना उनकी मजबूरी बन गई है।
पर्यटन कारोबार में दिख रहा असर
होटल कारोबारी गणेश रावत के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर उत्तराखंड के पर्यटन पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि अब सिर्फ शॉर्ट ट्रिप नहीं, बल्कि दो से तीन महीने के लॉन्ग-स्टे के लिए लगातार इंक्वायरी आ रही हैं। लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेहत को ध्यान में रखते हुए पहाड़ों में ठहरने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नैनीताल जिले और रामनगर क्षेत्र में AQI स्तर 100 से भी काफी कम रहता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से कहीं बेहतर है। साफ हवा, अच्छी धूप और शांत माहौल लोगों को यहां खींच ला रहा है।
छोटे होमस्टे बन रहे पसंदीदा
पर्यटन व्यवसाय से जुड़े इमरान खान का मानना है कि यह रुझान नैनीताल और कॉर्बेट क्षेत्र के पर्यटन के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने बताया कि छोटी-छोटी प्रॉपर्टीज और होमस्टे लॉन्ग-स्टे के लिए ज्यादा उपयुक्त साबित हो रहे हैं। क्यारी, पाटकोट, पंगोट, ढेला और जंगलों से सटे इलाके लॉन्ग-स्टे के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
हालांकि उन्होंने चिंता भी जताई कि अगर भीड़ इसी तरह बढ़ती रही तो रामनगर और नैनीताल जैसे शहरों में जाम और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ सकती है। वीकेंड पर रामनगर में लगने वाला भारी जाम इसकी चेतावनी है। उनका सुझाव है कि बड़े होटल्स के बजाय नेचर-फ्रेंडली और छोटे स्टे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
कॉर्बेट निदेशक का बयान
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि उत्तराखंड अपनी स्वच्छ हवा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। जब भी आसपास के महानगरों में वायु गुणवत्ता गिरती है, लोग सुकून और बेहतर वातावरण की तलाश में उत्तराखंड की ओर आते हैं। कॉर्बेट के घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और साफ वातावरण पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित कर रहे हैं। यही कारण है कि प्रदूषण के बढ़ते दौर में नैनीताल और कॉर्बेट जैसे क्षेत्र पर्यटकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

