रुद्रप्रयाग के गांव से IIT रोपड़ तक पहुंची संजीत सिंह कैंतुरा की वैज्ञानिक यात्रा, 15वें दीक्षांत समारोह में मिली Ph.D. की उपाधि
पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता और न्यूक्लियर इंस्ट्रूमेंटेशन पर शोध से बनाई पहचान, 15 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र प्रकाशित
रोपड़/रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के एक छोटे से गांव से शुरू हुई संजीत सिंह कैंतुरा की वैज्ञानिक यात्रा अब एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच गई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ (IIT Ropar) के 15वें दीक्षांत समारोह में संजीत सिंह कैंतुरा को भौतिकी विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि प्रदान की गई। संजीत ने IIT रोपड़ के भौतिकी विभाग से Experimental Nuclear Physics के क्षेत्र में अपना डॉक्टरेट शोध पूरा किया है।
संजीत की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी शैक्षणिक यात्रा उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के एक छोटे से गांव लुठियाग से शुरू हुई और आगे चलकर IIT रुड़की तथा IIT रोपड़ जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंची। आज वे पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता, विकिरण पहचान और आधुनिक न्यूक्लियर इंस्ट्रूमेंटेशन के क्षेत्र में शोध कर रहे हैं।

IIT Ropar में पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता पर शोध
संजीत के डॉक्टरेट शोध का विषय पर्यावरण में मौजूद प्राकृतिक रेडियोधर्मिता और उससे जुड़े संभावित जोखिमों पर केंद्रित रहा। उनके शोध प्रबंध का शीर्षक है—
“Radiological Investigations of Soil Samples from Neutral and Agrarian Lands (Implications for Land Use Patterns in Rupnagar District, Punjab, India)”
सरल शब्दों में उनका शोध यह समझने पर केंद्रित है कि मिट्टी में प्राकृतिक रूप से मौजूद रेडियोधर्मी तत्व किस मात्रा में हैं, उनका वितरण कैसा है और अलग-अलग भूमि उपयोग के कारण इनमें क्या बदलाव आता है। साथ ही संभावित विकिरण जोखिम का वैज्ञानिक आकलन भी उनके शोध का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
संजीत ने अपने शोध में High-Purity Germanium (HPGe) Gamma-Ray Spectroscopy जैसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक की मदद से मिट्टी के नमूनों में मौजूद विभिन्न रेडियोन्यूक्लाइड की पहचान और उनकी मात्रा का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है।

नाभिकीय भौतिकी को पर्यावरण और स्वास्थ्य से जोड़ा
संजीत का शोध केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। उन्होंने Nuclear Instrumentation, Radiation Detection और Radiological Risk Assessment जैसे क्षेत्रों को पर्यावरणीय अध्ययन से जोड़ने का प्रयास किया है।
उनके शोध में प्राकृतिक रेडियोधर्मिता के स्तर, संभावित बाहरी विकिरण संपर्क, absorbed dose और lifetime health risk जैसे पहलुओं का अध्ययन किया गया। इस तरह उनका अनुसंधान पर्यावरणीय निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को समझने में उपयोगी हो सकता है।
15 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र
संजीत सिंह कैंतुरा ने अब तक 15 से अधिक शोध-पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय peer-reviewed journals में प्रकाशित किए हैं। उनके शोध कार्य Experimental Nuclear Physics, Environmental Radioactivity, Radiation Detection, Nuclear Instrumentation, Gamma-Ray Spectroscopy और Radiological Risk Assessment जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं।
उनके शोध-पत्र Scientific Reports, Nuclear Engineering and Technology, Environmental Monitoring and Assessment, Journal of Radioanalytical and Nuclear Chemistry, Nuclear Instruments and Methods in Physics Research Section A, Applied Radiation and Isotopes तथा The European Physical Journal Special Topics जैसी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी शोध की प्रस्तुति
संजीत ने अपने शोध को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलनों में भी प्रस्तुत किया है। इनमें DAE Symposium on Nuclear Physics, Asian and Oceanic Congress for Radiation Protection (AOCRP6), International Conference on Applied Nuclear Physics (ANP) और Radiation Awareness and Detection in Natural Environment (RADNET) प्रमुख हैं।
उन्होंने ग्रीस की Aristotle University of Thessaloniki में आयोजित International Conference on Applied Nuclear Physics में भी अपना शोध प्रस्तुत किया। इसके अलावा RADNET सम्मेलन में उन्हें Oral Presentation Category में Best Presentation Award से सम्मानित किया गया।
गांव लुठियाग से शुरू हुई पढ़ाई
संजीत की सफलता की कहानी उनके शोध और Ph.D. से कहीं आगे जाती है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रुद्रप्रयाग के लुठियाग गांव में कक्षा आठ तक पूरी की। इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय, बांसू जखधार, रुद्रप्रयाग से आगे की पढ़ाई की।
उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर से Physics में स्नातक और परास्नातक शिक्षा हासिल की। इसके बाद IIT रुड़की से Solid State Electronic Materials (SSEM) में M.Tech. किया और फिर IIT रोपड़ के Physics Department में Experimental Nuclear Physics और Environmental Radioactivity के क्षेत्र में Ph.D. शोध किया।
GATE और CSIR-NET में भी शानदार प्रदर्शन
संजीत ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उन्होंने GATE-2017 में Physics विषय में सफलता प्राप्त की। वहीं CSIR-NET 2017 परीक्षा उन्होंने दो बार उत्तीर्ण की।
CSIR-NET June 2017 में उन्होंने All India Rank 69, जबकि December 2017 में All India Rank 41 हासिल की। M.Tech. और Ph.D. के दौरान उन्हें संस्थागत फेलोशिप भी प्राप्त हुई।
Ph.D. के बाद भी जारी है शोध
Ph.D. की उपाधि हासिल करने के बाद भी संजीत का वैज्ञानिक सफर जारी है। वर्तमान में वे Plaksha University में Research Associate/Postdoctoral Research Fellow के रूप में कार्य कर रहे हैं और Department of Science and Technology (DST), Government of India द्वारा वित्तपोषित I-Hub AWaDH परियोजना से जुड़े हैं।
उनका वर्तमान शोध पंजाब की कृषि भूमि में प्राकृतिक रेडियोन्यूक्लाइड के Spatial Distribution को समझने पर केंद्रित है। इसमें रूपनगर, शहीद भगत सिंह नगर और साहिबजादा अजीत सिंह नगर जिलों के विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक रेडियोधर्मिता का वैज्ञानिक मानचित्र तैयार करना, संभावित radiological hotspots की पहचान करना और क्षेत्रवार विकिरण जोखिम का आकलन करना है।
उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा
संजीत सिंह कैंतुरा की कहानी सिर्फ एक Ph.D. हासिल करने की उपलब्धि नहीं है। यह उस वैज्ञानिक यात्रा की कहानी है, जिसकी शुरुआत रुद्रप्रयाग के एक छोटे से गांव से हुई और जो IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से होते हुए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच तक पहुंची।
IIT रोपड़ के 15वें दीक्षांत समारोह में मिली Ph.D. की उपाधि उनकी इस लंबी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पर्यावरणीय रेडियोधर्मिता, Radiation Detection और Nuclear Instrumentation के क्षेत्र में उनका शोध यह दिखाता है कि छोटे शहरों और गांवों से निकलने वाले युवा भी उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बना सकते हैं।

