देहरादून- ग्राफिक एरा में ‘ग्लोबल विलेज’ का आयोजन, 32 देशों की संस्कृति और व्यंजनों से रूबरू हुए छात्र
देहरादून, 6 अगस्त। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में नए बीटेक छात्र-छात्राओं को वैश्विक अवसरों और बहुसांस्कृतिक वातावरण से परिचित कराने के लिए ‘ग्लोबल विलेज’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 32 देशों के छात्र-छात्राओं ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया, जिससे नए छात्रों को दुनिया की विविध संस्कृतियों को करीब से जानने का अवसर मिला।
विदेशों में इंटर्नशिप और अकादमिक अवसरों की जानकारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीन ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स डॉ. डी.आर. गंगोडकर ने कहा कि ग्राफिक एरा के छात्रों के लिए जर्मनी, इटली, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों में अंतरराष्ट्रीय इंटर्नशिप, इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स, समर एवं विंटर अकादमिक प्रोजेक्ट्स और वैश्विक नेटवर्किंग के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि ये अवसर विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने और अंतरराष्ट्रीय करियर की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

32 देशों की संस्कृति और स्वाद का अनूठा संगम
ग्लोबल विलेज में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने अपने-अपने देशों की संस्कृति पर आधारित रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। वहीं आयोजित इंटरनेशनल फूड फेस्ट में भारत सहित 32 देशों के छात्रों ने अपने पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई।
नए छात्रों ने म्यांमार, रूस, तुर्की, रवांडा, लेसोथो, जिम्बाब्वे, युगांडा, तंजानिया, दक्षिण सूडान सहित कई देशों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा और उनकी संस्कृति, परंपराओं एवं जीवनशैली के बारे में जानकारी प्राप्त की।
वैश्विक सोच को बढ़ावा देने की पहल
कार्यक्रम का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स और AIESEC के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस दौरान विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने अपनी संस्कृति और अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में म्यांमार के थांग कोप सांग और सॉ था क्लेर तॉ, दक्षिण सूडान की समा नूमे जूमे मॉरिस और जेम्स कियाम, लाइबेरिया के सैम डिएगो कुमार, रवांडा के केविन तथा नेपाल के सरगम और पीयूष राणा सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय छात्र-छात्राएं शामिल रहे।
ग्राफिक एरा का यह आयोजन छात्रों को वैश्विक संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और विविधता को समझने का अवसर देने के साथ-साथ उन्हें वैश्विक नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास रहा।

