देहरादून महायोजना-2041: 28 जुलाई से 4 अगस्त तक एमडीडीए कार्यालय में होगी विशेष जनसुनवाई
देहरादून, 24 जुलाई। राजधानी देहरादून के सुनियोजित और सतत विकास के लिए तैयार की जा रही देहरादून महायोजना-2041 में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने नागरिकों को एक और अवसर देने का निर्णय लिया है। सेक्टरवार जनसुनवाई अभियान के सफल समापन के बाद अब 28 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक एमडीडीए कार्यालय, ट्रांसपोर्ट नगर में विशेष जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जहां कोई भी नागरिक महायोजना के प्रारूप पर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेगा।
विशेष जनसुनवाई प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित होगी। एमडीडीए का उद्देश्य है कि राजधानी के भविष्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में कोई भी नागरिक अपनी राय रखने से वंचित न रहे।
जनभागीदारी से तैयार होगी देहरादून की विकास रूपरेखा
एमडीडीए के अनुसार, देहरादून महायोजना-2041 का लक्ष्य राजधानी को वर्ष 2041 तक एक सुनियोजित, आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरणीय रूप से संतुलित शहर के रूप में विकसित करना है। इसके तहत सड़क नेटवर्क, यातायात प्रबंधन, आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाएं, जल निकासी, पार्किंग, हरित क्षेत्र, जलापूर्ति और भविष्य की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए आधारभूत ढांचे का व्यापक खाका तैयार किया जा रहा है।
प्राधिकरण का कहना है कि अंतिम महायोजना तैयार करने से पहले नागरिकों से प्राप्त प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का तकनीकी, विधिक और व्यावहारिक परीक्षण किया जाएगा, ताकि योजना स्थानीय आवश्यकताओं और जनभावनाओं के अनुरूप तैयार हो सके।
सेक्टरवार जनसुनवाई को मिला व्यापक जनसमर्थन
एमडीडीए द्वारा 6 जुलाई से 21 जुलाई तक आयोजित सेक्टरवार जनसुनवाई अभियान में नागरिकों, भू-स्वामियों, शिक्षाविदों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान लोगों ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण, ट्रैफिक जाम, पार्किंग संकट, सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
कई प्रतिभागियों ने चंद्रबनी, मोहकमपुर, शिमला बाईपास और अन्य क्षेत्रों में भविष्य की आबादी को ध्यान में रखते हुए सड़क संपर्क मजबूत करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हरित दून की पहचान बचाने पर विशेष जोर
जनसुनवाई के दौरान पर्यावरण संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रहा। नागरिकों ने वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा, हरित क्षेत्रों के विस्तार और खुले सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण की मांग की।
लोगों का कहना था कि देहरादून की सबसे बड़ी पहचान उसकी प्राकृतिक हरियाली और पर्यावरणीय विरासत है। इसलिए महायोजना में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार बने विकास मॉडल
भूमि उपयोग, विकास नियंत्रण नियमों और संस्थागत विकास से जुड़े विषयों पर भी नागरिकों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रतिभागियों का कहना था कि राजधानी के प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए विकास मॉडल भी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए।
एमडीडीए अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सभी सुझावों और आपत्तियों का गंभीरता से अध्ययन कर अंतिम महायोजना में उचित स्थान दिया जाएगा।
बंशीधर तिवारी बोले— जनता की भागीदारी ही महायोजना की सबसे बड़ी ताकत
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल भवनों और सड़कों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजधानी का समग्र विजन है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान मिले सुझाव योजना को अधिक व्यवहारिक, जनोन्मुखी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में मदद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करना महायोजना का मूल उद्देश्य है। इसी सोच के तहत जनता को दोबारा सुझाव देने का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर राजधानी के सुनियोजित भविष्य के निर्माण में सहयोग करने की अपील की।
मोहन सिंह बर्निया ने दिया पारदर्शी प्रक्रिया का भरोसा
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम तकनीकी, विधिक और व्यावहारिक पहलुओं के आधार पर उनका परीक्षण करेगी।
उन्होंने कहा कि महायोजना का उद्देश्य केवल शहरी विस्तार नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना है। इसलिए प्राप्त सभी सुझावों को गंभीरता से अंतिम प्रारूप में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

