देहरादून महायोजना-2041: सेक्टर-11 की जनसुनवाई में विकास और पर्यावरण पर गूंजे नागरिकों के सुझाव
देहरादून, 21 जुलाई 2026। राजधानी देहरादून के भविष्य को सुनियोजित, आधुनिक और सतत विकास की दिशा देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही देहरादून महायोजना-2041 को लेकर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) का जनसंवाद अभियान अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। अभियान के 11वें दिन सोमवार को राजकीय बालिका पॉलिटेक्निक कॉलेज, सुद्धोवाला में सेक्टर-11 की जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय नागरिकों, भू-स्वामियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।
जनसुनवाई के दौरान एमडीडीए के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने महायोजना-2041 के प्रस्तावों की जानकारी साझा की और नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित किया। लोगों ने सड़क, यातायात, पार्किंग, आवास, आधारभूत सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव रखे। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सभी सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी एवं विधिक परीक्षण कर उन्हें अंतिम महायोजना में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
यातायात, आवास और बुनियादी सुविधाओं पर दिया गया विशेष जोर
जनसुनवाई में नागरिकों ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आबादी के दबाव को देखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजना तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। लोगों ने सड़क नेटवर्क का विस्तार, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने, ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार तथा नए संपर्क मार्ग विकसित करने के सुझाव दिए।
प्रतिभागियों ने पार्किंग की समस्या, आंतरिक सड़कों की स्थिति, नए आवासीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता, पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार को भी महायोजना में प्राथमिकता देने की मांग की। उनका कहना था कि योजना केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रहकर अगले दो दशकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण को महायोजना का प्रमुख हिस्सा बनाने की मांग
जनसुनवाई में पर्यावरण संरक्षण का विषय भी प्रमुखता से सामने आया। नागरिकों ने हरित क्षेत्रों, प्राकृतिक जल स्रोतों और खुले सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की मांग की।
इसके अलावा वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि देहरादून की पहचान उसकी हरियाली और प्राकृतिक संपदा से है, इसलिए विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया जाना चाहिए।
स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो विकास मॉडल
भू-स्वामियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने भूमि उपयोग (Land Use), विकास नियंत्रण नियमों और क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास मॉडल तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाई जाएगी तो उसका लाभ अधिक प्रभावी रूप से मिलेगा।
एमडीडीए की तकनीकी टीम ने स्पष्ट किया कि सभी सुझावों और आपत्तियों का विस्तृत अध्ययन कर व्यवहारिक और जनहितकारी सुझावों को अंतिम महायोजना में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
21 जुलाई को सेक्टर-12 की जनसुनवाई
एमडीडीए ने बताया कि जनसंवाद अभियान के तहत सेक्टर-12 की जनसुनवाई 21 जुलाई को प्रातः 11 बजे चंद्रबनी रोड स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) सभागार में आयोजित की जाएगी। संबंधित क्षेत्र के नागरिक वहां पहुंचकर महायोजना-2041 से जुड़े अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
जनभागीदारी से बनेगी प्रभावी महायोजना
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल एक तकनीकी दस्तावेज नहीं, बल्कि राजधानी के भविष्य की विकास दृष्टि है। उन्होंने कहा कि नागरिकों से प्राप्त सुझाव योजना को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और दूरदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जितनी अधिक जनभागीदारी होगी, महायोजना उतनी ही प्रभावी और जनहितकारी बनेगी।
हर सुझाव का होगा तकनीकी एवं विधिक परीक्षण
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम सभी बिंदुओं का तकनीकी, विधिक और व्यावहारिक परीक्षण करेगी, ताकि अंतिम महायोजना विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित कर सके।

