ब्रेन में पेसमेकर लगाकर पार्किंसंस का सफल इलाज, ग्राफिक एरा अस्पताल के डॉक्टरों ने रचा नया इतिहास
देहरादून, 7 मई। उत्तराखंड में चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ग्राफिक एरा अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक 71 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के ब्रेन में पेसमेकर लगाकर पार्किंसंस रोग का सफल उपचार किया है। अत्याधुनिक तकनीक डीप ब्रेन स्टीम्यूलेशन (DBS) के माध्यम से की गई इस जटिल न्यूरोसर्जरी के बाद मरीज की हालत में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
मरीज पिछले करीब 10 वर्षों से पार्किंसंस बीमारी से जूझ रहा था। उसे हाथों में लगातार कंपकंपी, शरीर में जकड़न, चलने-फिरने में अत्यधिक धीमापन और दैनिक कार्यों को करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लंबे समय से दवाइयों के बावजूद राहत नहीं मिलने पर मरीज को ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल के विशेषज्ञ न्यूरोसर्जन डॉ. पार्था पी. बिष्णु, डॉ. अंकुर कपूर, डॉ. पयोज़ पांडेय और डॉ. नेहा अग्रवाल की टीम ने न्यूरोएनेस्थीसिया एवं न्यूरोक्रिटिकल केयर टीम के सहयोग से मरीज के मस्तिष्क में विशेष पेसमेकर सफलतापूर्वक स्थापित किया। इस तकनीक के जरिए मस्तिष्क के प्रभावित हिस्सों में नियंत्रित विद्युत संकेत भेजे जाते हैं, जिससे पार्किंसंस के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर रही। डॉक्टरों के अनुसार मरीज के हाथों की कंपकंपी में काफी कमी आई है, शरीर की जकड़न घटी है और चलने-फिरने की क्षमता में भी पहले के मुकाबले सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डीप ब्रेन स्टीम्यूलेशन जैसी अत्याधुनिक न्यूरोसर्जरी सुविधाएं अब तक देश के चुनिंदा बड़े महानगरों के अस्पतालों में ही उपलब्ध थीं। लेकिन ग्राफिक एरा अस्पताल ने आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से उत्तराखंड में ही यह सुविधा उपलब्ध कराकर राज्य के मरीजों को बड़ी राहत दी है।
यह उपलब्धि न केवल ग्राफिक एरा अस्पताल के लिए बल्कि पूरे उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे भविष्य में गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के मरीजों को राज्य के बाहर जाने की जरूरत कम होगी।

