उत्तराखंड में स्कूलों की नई समय-सारिणी जारी, 1 अप्रैल से 31 मार्च तक शिफ्ट में चलेंगे विद्यालय
उत्तराखंड में स्कूलों की नई समय-सारिणी लागू, ग्रीष्म और शीतकाल के अनुसार बदलेंगी टाइमिंग
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी राजकीय और निजी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के लिए नई समय-सारिणी जारी कर दी है। अब स्कूलों का संचालन सालभर एक ही समय पर नहीं, बल्कि ग्रीष्मकाल और शीतकाल के अनुसार अलग-अलग शिफ्ट में किया जाएगा। यह व्यवस्था 1 अप्रैल से 31 मार्च तक प्रभावी रहेगी।
शासन द्वारा जारी संशोधित आदेश में बताया गया है कि पहले 6 अप्रैल 2026 को जारी समय-सारिणी में आंशिक बदलाव करते हुए नई टाइमिंग लागू की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में पढ़ाई के कुल समय में कटौती नहीं होगी।
🌞 ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी (1 अप्रैल – 30 सितंबर)
गर्मी के मौसम में स्कूल सुबह जल्दी शुरू होंगे।
- प्रार्थना सभा: 7:15 से 7:30 बजे
- कक्षाएं: 7:30 से 1:00 बजे तक
पीरियड टाइमिंग:
- 1st: 7:30 – 8:10
- 2nd: 8:10 – 8:50
- 3rd: 8:50 – 9:30
- 4th: 9:30 – 10:10
- मध्यांतर: 10:10 – 10:40
- 5th: 10:40 – 11:15
- 6th: 11:15 – 11:50
- 7th: 11:50 – 12:25
- 8th: 12:25 – 1:00
❄️ शीतकालीन समय-सारिणी (1 अक्टूबर – 31 मार्च)
सर्दियों में स्कूल देर से शुरू होंगे।
- प्रार्थना सभा: 8:45 से 9:00 बजे
- कक्षाएं: 9:00 से 3:10 बजे तक
पीरियड टाइमिंग:
- 1st: 9:00 – 9:45
- 2nd: 9:45 – 10:30
- 3rd: 10:30 – 11:15
- 4th: 11:15 – 12:00
- मध्यांतर: 12:00 – 12:30
- 5th: 12:30 – 1:10
- 6th: 1:10 – 1:50
- 7th: 1:50 – 2:30
- 8th: 2:30 – 3:10
📌 स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव संभव
सरकार ने आदेश में यह प्रावधान भी रखा है कि यदि किसी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, मौसम या परिवहन समस्याएं समय-सारिणी में बदलाव की मांग करती हैं, तो विद्यालय प्रस्ताव भेज सकते हैं।
इस पर निर्णय लेने के लिए एक समिति गठित होगी, जिसमें:
- जिलाधिकारी (अध्यक्ष)
- मुख्य शिक्षा अधिकारी
- जिला शिक्षा अधिकारी
- खंड शिक्षा अधिकारी
- संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य
शामिल होंगे।
🎯 शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर
शासन ने साफ किया है कि चाहे कोई भी बदलाव हो, पढ़ाई का कुल समय बरकरार रखना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों की सुविधा, मौसम के अनुसार बेहतर पढ़ाई और पूरे राज्य में एक समान शैक्षणिक प्रणाली लागू करना है।

