देहरादून: अब बस से स्कूल जाएंगे भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए बच्चे; डीएम सविन बंसल ने दिखाई 41-सीटर बस को हरी झंडी
देहरादून, 30 अप्रैल 2026 (सू.वि.)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बाल भिक्षावृत्ति के समूल उन्मूलन और रेस्क्यू किए गए बच्चों के बेहतर पुनर्वास की दिशा में जिला प्रशासन ने एक और बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में संचालित ‘बाल भिक्षावृत्ति निवारण प्रयास/आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर’ के बच्चों के लिए जिलाधिकारी ने खुद 41-सीटर स्कूल बस का उद्घाटन किया और उसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
DMF फंड से मिली शिक्षा की सवारी
जिलाधिकारी सविन बंसल ने ‘डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन’ (DMF) फंड के माध्यम से इस 41-सीटर बस को स्वीकृत किया है। यह बस राजा रोड स्थित ‘साधु राम इंटर कॉलेज’ में पंजीकृत बच्चों को घर से विद्यालय लाने और ले जाने का कार्य करेगी।
- गौरतलब है कि इससे पहले भी जिला प्रशासन द्वारा भिक्षावृत्ति और बाल मजदूरी में संलिप्त बच्चों के रेस्क्यू के लिए 3 वाहन पहले ही दिए जा चुके हैं।
369 बच्चों का रेस्क्यू, 200 से अधिक बच्चे जुड़े मुख्यधारा से
बस के उद्घाटन के दौरान जिलाधिकारी ने रेस्क्यू किए गए बच्चों के शैक्षणिक पुनर्वास की विस्तृत समीक्षा की। आंकड़ों के अनुसार:
- अब तक कुल 369 बच्चों को सड़कों और सार्वजनिक स्थानों से रेस्क्यू किया गया है।
- इनमें से 200 बालक-बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया है।
- चौराहों पर कड़ी निगरानी और त्वरित रेस्क्यू सुनिश्चित करने के लिए 15 होमगार्ड जवानों की विशेष तैनाती की गई है।
मॉडल सेंटर के रूप में विकसित हो रहा ‘आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर’
देहरादून का यह केंद्र केवल एक आश्रय गृह नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास का एक आधुनिक हब बनकर उभर रहा है। यहाँ रेस्क्यू किए गए बच्चों के सर्वांगीण विकास और उज्ज्वल भविष्य के लिए कई बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं:
- कम्प्यूटर शिक्षा व डिजिटल लर्निंग
- खेलकूद गतिविधियां और शारीरिक विकास
- संगीत प्रशिक्षण और कला संवर्धन
- मानसिक शांति के लिए नियमित योग अभ्यास
- पुस्तकालय (लाइब्रेरी) की सुविधा
इन सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को केवल आश्रय ही नहीं दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें एक बेहतर नागरिक बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

डीएम के सख्त निर्देश: पुनर्वास और कौशल विकास पर हो फोकस
उद्घाटन के पश्चात जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाल भिक्षावृत्ति के विरुद्ध चल रहे अभियान को और अधिक आक्रामक व प्रभावी बनाया जाए। रेस्क्यू के बाद बच्चों के पुनर्वास, उनकी निरंतर शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर इस मिशन को सफल बनाने पर बल दिया।
ये अधिकारी रहे मौजूद: इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष/सदस्य नमिता मंमगाई, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. मनोज कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेन्द्र कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल और जिला कमांडेंट होमगार्ड सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं समाज सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

