उत्तराखंड में कार्बन क्रेडिट की नई पहल: किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
देहरादून, 9 अप्रैल 2026 — National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड) और NABCONS की पहल पर उत्तराखंड में कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस संबंध में सचिव जलागम Javalakar की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर विस्तृत अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए।
सॉंग नदी बेसिन पर फोकस
यह अध्ययन विशेष रूप से देहरादून और टिहरी जिलों के Song River बेसिन में किया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्बन क्रेडिट के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
सचिव ने निर्देश दिए कि तैयार की जाने वाली रिपोर्ट को एक मानक प्रोटोकॉल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सके।
मैदानी सर्वे और ग्रामीण संवाद
10 अप्रैल को टिहरी के रिंगलगढ़ क्षेत्र में NABCONS और सारा (SARA) की टीम ने संयुक्त क्षेत्र भ्रमण किया।
इस दौरान पिरुल (चीड़ की सूखी पत्तियों) से बनने वाले बायोचार और उसके कार्बन क्रेडिट संभावनाओं पर ग्रामीणों के साथ संवाद किया गया।
कार्बन क्रेडिट के प्रमुख मॉडल
1. एग्रोफॉरेस्ट्री (Agroforestry)
खेतों और मेड़ों पर पेड़-पौधों का रोपण कर:
- लकड़ी, फल और चारा से अतिरिक्त आय
- प्रति हेक्टेयर 2–8 टन CO₂ अवशोषण की संभावना
- कार्बन क्रेडिट के रूप में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आय
2. मृदा कार्बन (SOC – Soil Organic Carbon)
जैविक खेती, हरी खाद और कम जुताई से:
- मिट्टी की उर्वरता और जलधारण क्षमता बढ़ेगी
- कार्बन संचयन में वृद्धि
- किसानों को सामूहिक कार्बन क्रेडिट का लाभ
3. बायोचार (Biochar)
पिरुल और कृषि अपशिष्ट से बनने वाला बायोचार:
- मिट्टी की गुणवत्ता सुधारता है
- 1 टन बायोचार = 2–3 टन CO₂ का स्थायी संचयन
- दीर्घकालिक कार्बन क्रेडिट का मजबूत स्रोत
4. पिरुल आधारित ब्रिकेट्स
चीड़ की पत्तियों से ईंधन ब्रिकेट्स बनाकर:
- जंगलों में आग की घटनाओं में कमी
- स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
- ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
इन सभी गतिविधियों को मिलाकर “कार्बन क्रेडिट क्लस्टर मॉडल” विकसित किया जाएगा, जिससे:
- किसानों को सीधे आय का स्रोत मिलेगा
- स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- महिला समूहों और FPOs की भागीदारी मजबूत होगी
मार्केटिंग और सिस्टम विकास
कार्बन क्रेडिट की बिक्री के लिए MRV (Monitoring, Reporting, Verification) प्रणाली विकसित की जाएगी।
इससे किसानों को पारदर्शी और सुनिश्चित लाभ मिल सकेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होगी।

