‘ट्रंप के आगे देश को गिरवी रखा’: एपस्टीन फाइल्स को लेकर यूथ कांग्रेस का पीएम मोदी पर हमला
नई दिल्ली। पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ और चर्चित एपस्टीन फाइल्स को लेकर मचे राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में देशभर से आए युवा कांग्रेस कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव भी मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उदय भानु चिब ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “एपस्टीन फाइल्स के डर से प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने पूरी तरह सरेंडर कर दिया है। यह प्रधानमंत्री की कमजोरी को दर्शाता है। जिन लोगों ने मोदी की छवि गढ़ी थी, वही अब उसे खत्म कर रहे हैं।”
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि एपस्टीन फाइल्स से जुड़े कई अहम खुलासे अभी सामने आने बाकी हैं, जिन्हें जानबूझकर रोका जा रहा है। उन्होंने कहा, “पूरा देश जानना चाहता है कि एपस्टीन फाइल्स में क्या है। प्रधानमंत्री पर भारी दबाव है। चार महीनों से अटका भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बिना किसी बदलाव के अचानक एक ही शाम में साइन कर दिया गया। यह साफ दिखाता है कि पीएम दबाव में हैं।”
उदय भानु चिब ने आरोप लगाया कि “प्रधानमंत्री ने देश के फैसले, देश की गरिमा और राष्ट्रीय हितों को ट्रंप के सामने गिरवी रख दिया, ताकि एपस्टीन फाइल्स से जुड़े घोटाले सामने न आ सकें।”
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की किताब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सवालों और नरवणे की किताब में लिखे तथ्यों से डर गए हैं। “इसी वजह से संसद से भागने और झूठ का सहारा लेने की कोशिश की गई। पिछले हफ्ते संसद में जो हुआ, वह पूरी तरह अलोकतांत्रिक था,” उन्होंने कहा।
यूथ कांग्रेस प्रमुख ने आगे आरोप लगाया कि “राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाने के बावजूद विपक्ष के नेता को संसद में बोलने नहीं दिया गया। यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार हुआ है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया।”
चिब ने दावा किया कि जनरल नरवणे की किताब में सामने आए तथ्यों से यह कड़वा सच उजागर हुआ है कि जब चीन भारत पर दबाव बना रहा था, तब प्रधानमंत्री सेना के साथ मजबूती से खड़े नहीं थे। उन्होंने कहा कि “इसी सच्चाई को दबाने के लिए बहस रोकी गई और संसद को खामोश किया गया। विपक्ष इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा।”

