ग्राफिक एरा में एआई पर विशेष सत्र, विशेषज्ञ ने बताया—तकनीक बदल रही काम करने का तरीका
देहरादून, 24 मार्च। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित एक विशेष सत्र में एडब्ल्यूएस (भारत एवं दक्षिण एशिया) के डेटा और एआई हेड श्री बिस्वजीत दास ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उसके भविष्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज एआई मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझकर उसे तकनीक के माध्यम से दोहराने का प्रयास कर रहा है। जीवन के अनुभवों से एकत्रित डेटा नए विचारों और समझ का आधार बनता है, जो एआई के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
श्री दास ने कहा कि वर्तमान समय में विभिन्न व्यवसाय एआई का उपयोग अनुभव को बेहतर बनाने, कार्यक्षमता बढ़ाने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए कर रहे हैं। एआई तकनीक बड़े आयोजनों का सारांश तैयार करने, जटिल प्रक्रियाओं जैसे टैक्स प्रणाली को सरल बनाने और समय की बचत में सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई काम करने के तरीकों में व्यापक बदलाव लाकर नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि एआई अब लोगों की दैनिक जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है और तकनीक को पहले से अधिक स्मार्ट बना रहा है। एआई आधारित एजेंट्स अब संदेश भेजने, कार्य प्रबंधन करने और निर्णय लेने जैसे कार्यों को आसानी से संपन्न कर सकते हैं। तकनीक अब केवल इंसानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एजेंट्स के बीच संवाद और सहयोग भी संभव हो गया है। बैंकिंग से लेकर वेयरहाउस तक, हर क्षेत्र में एआई कार्यों को तेज और सरल बना रहा है।
श्री दास ने कहा कि भविष्य में एआई युवाओं को अपने विचारों को तेजी से वास्तविकता में बदलने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
इस अवसर पर ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन प्रो. डॉ. कमल घनशाला ने श्री बिस्वजीत दास को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में वाइस चांसलर डॉ. नरपिंदर सिंह, प्रो वीसी डॉ. संतोष एस सर्राफ, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, एडब्ल्यूएस कॉर्डिनेटर डॉ. आकांक्षा गुप्ता, सुमित गुप्ता, प्रशांत प्रियम सहित अन्य पदाधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

