पान मसाला भ्रामक विज्ञापन मामला: राज्य उपभोक्ता आयोग ने सलमान खान और राजश्री की रिवीजन याचिका खारिज की
पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन से जुड़े मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने अभिनेता Salman Khan और Rajshree Pan Masala की ओर से दायर रिवीजन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष Justice Devendra Kachhawaha, न्यायिक सदस्य Arun Kumar Agrawal और सदस्य Liaqat Ali शामिल थे, ने अपने आदेश में कहा कि भारत जैसे विशाल देश में केवल Central Consumer Protection Authority को ही इस तरह की शक्तियां देने के प्रावधान पर विधायिका को पुनर्विचार करना चाहिए। आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य आयोगों को भी ऐसे मामलों की सीधे सुनवाई करने का अधिकार दिया जाना चाहिए, ताकि भ्रामक विज्ञापनों से आम लोगों को समय पर राहत मिल सके।
आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में परिवादी के परिवाद दायर करने के अधिकार को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग में पहले से ही एक प्रार्थना पत्र लंबित है। ऐसे में उसी आधार पर राज्य आयोग में याचिका दाखिल कर जिला आयोग के कार्य को राज्य आयोग से करवाने का प्रयास किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। उल्लेखनीय है कि रिवीजन याचिकाओं में District Consumer Commission क्रम संख्या-2 के 6 जनवरी और 15 जनवरी के आदेशों को चुनौती दी गई थी। इन आदेशों में आयोग ने राजश्री पान मसाला के भ्रामक प्रचार पर रोक लगाने के साथ ही अभिनेता सलमान खान के हस्ताक्षर मौका कमिश्नर की उपस्थिति में कराने के निर्देश दिए थे।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया था कि Consumer Protection Act 2019 की धारा 89 में भ्रामक विज्ञापनों के लिए दंड का प्रावधान है और धारा 92 के अनुसार केवल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण या उसके अधिकृत अधिकारी ही इस संबंध में परिवाद पेश कर सकते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इस मामले में परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता। हालांकि राज्य आयोग ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और दोनों रिवीजन याचिकाओं को खारिज कर दिया।
दरअसल, परिवादी Yogendra Singh ने जिला आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए राजश्री पान मसाला को अपने उत्पाद की बिक्री रोकने और सलमान खान को इसके भ्रामक विज्ञापन करने से रोकने की मांग की थी। आयोग के इस फैसले को भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ सख्ती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

