जम्मू-कश्मीर: आतंकी संगठनों से संबंध के आरोप में 5 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त, LG का बड़ा एक्शन
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मंगलवार को राज्य सरकार ने पांच सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। इन कर्मचारियों पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिज़्बुल मुजाहिद्दीन (HM) के लिए काम करने और राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बनने के गंभीर आरोप हैं। सभी को संविधान के अनुच्छेद 311(2)(C) के तहत तत्काल प्रभाव से हटाया गया है।
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी और वन विभाग से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
बर्खास्त किए गए कर्मचारी और आरोप
- मोहम्मद इशफाक (शिक्षक): लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने और पाकिस्तान स्थित आतंकी कमांडरों के संपर्क में रहने का आरोप। डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या की साजिश में संलिप्तता के आरोप में अप्रैल 2022 में गिरफ्तार किया गया था।
- तारिक अहमद राह (लैब तकनीशियन, स्वास्थ्य विभाग): हिज़्बुल मुजाहिद्दीन से संबंध और एक वांछित आतंकी को पाकिस्तान भगाने में मदद का आरोप।
- बशीर अहमद मीर (सहायक लाइनमैन, PHE विभाग): गुरेज घाटी में लश्कर का ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) बताया गया। 2021 में उसके घर में दो लश्कर आतंकवादी मारे गए थे।
- फारूक अहमद भट (फील्ड वर्कर, वन विभाग): हिज़्बुल मुजाहिद्दीन से जुड़े एक पूर्व विधायक का निजी सहायक रहने और आतंकी कमांडर अमीन बाबा को पाकिस्तान भेजने की साजिश में शामिल होने का आरोप। सरकारी आईडी का दुरुपयोग कर सुरक्षा चौकियों से आतंकी को पार कराने का भी आरोप है।
- मोहम्मद यूसुफ (चालक, स्वास्थ्य विभाग): आतंकियों के लिए संचार नेटवर्क उपलब्ध कराने और हथियारों की तस्करी में संलिप्तता का आरोप। जुलाई 2024 में उसके वाहन से पिस्तौल, गोला-बारूद, ग्रेनेड और नकदी बरामद की गई थी।
2021 से अब तक 85 से अधिक बर्खास्त
इन पांच मामलों के साथ ही वर्ष 2021 से अब तक आतंकवाद से जुड़े आरोपों में बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मचारियों की संख्या 85 से अधिक हो गई है। सरकार ने निजी कंपनियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी रिटायर्ड या पूर्व सरकारी कर्मचारी को नौकरी देने से पहले पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराएं।
सूत्रों के मुताबिक, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अगुवाई में यह सख्त कदम सरकारी तंत्र से आतंकी प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने और राज्य की सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

